
अकृति चौधरी को NSA में भेजना पड़ा भारी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिरासत रद्द की
नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा अकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अकृति चौधरी की NSA के तहत की गई निरोधात्मक हिरासत को रद्द कर दिया और उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत जरूरी न हो। अदालत ने मामले में ₹5 लाख का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
यह मामला नोएडा में मजदूरों के वेतन और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस और प्रशासन की ओर से अकृति चौधरी पर प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिंसा के लिए उकसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ NSA लगाया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश सामग्री को लेकर अदालत ने कई गंभीर सवाल उठाए।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि आखिर ऐसा कौन सा ठोस सबूत है, जिससे यह साबित हो कि अकृति चौधरी ने प्रदर्शनकारियों को पथराव करने या वाहनों में आग लगाने के लिए उकसाया था। सरकार की ओर से गवाहों के बयानों का हवाला दिया गया, लेकिन अदालत ने यह भी सवाल किया कि क्या इन आरोपों की पुष्टि प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग से होती है।
कोर्ट ने विशेष रूप से उस वीडियो फुटेज के बारे में सवाल किया, जिसका हवाला राज्य की ओर से अकृति की भूमिका साबित करने के लिए दिया गया था। अदालत ने सरकार से कहा कि वह ऐसा वीडियो पेश करे, जिसमें अकृति को कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को भड़काते हुए दिखाया गया हो। सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से यह भी पूछा गया कि क्या कोई ऐसा डिजिटल या व्हाट्सऐप संदेश मौजूद है, जिसमें अकृति ने हिंसा के लिए कोई अपील की हो।
अदालत के सवालों के बाद राज्य की ओर से जिस वीडियो का उल्लेख किया गया था, उसे पेश करने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। इसके बाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत की गई हिरासत को उचित आधार के अभाव में रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निरोधात्मक हिरासत के इस्तेमाल से जुड़े महत्वपूर्ण आदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
मामले में कोर्ट ने ₹5 लाख मुआवजे का आदेश भी दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूल की जानी है। इसमें पुलिस स्तर से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों तक की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात सामने आई है। वकील के अनुसार, NSA लगाने की प्रक्रिया में SHO से लेकर जिला मजिस्ट्रेट स्तर तक के अधिकारियों की भूमिका थी, इसलिए मुआवजे की राशि उनकी सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया गया।
इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने केवल हिरासत खत्म नहीं की, बल्कि कथित तौर पर पर्याप्त आधार के बिना किसी व्यक्ति को इतने कड़े कानून के तहत हिरासत में रखने के परिणामस्वरूप मुआवजे की जिम्मेदारी भी तय की। NSA एक सख्त कानून है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को भविष्य में संभावित खतरे को रोकने के उद्देश्य से निरोधात्मक हिरासत में रखा जा सकता है। ऐसे कानून के इस्तेमाल में प्रशासन से मजबूत और विश्वसनीय आधार की अपेक्षा की जाती है।
हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अकृति चौधरी की तत्काल रिहाई की स्थिति उनके खिलाफ दर्ज दूसरे मामलों पर भी निर्भर करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, NSA मामले में राहत मिलने के बावजूद वह अन्य मामलों में जमानत नहीं मिलने तक हिरासत में रह सकती हैं। उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों में कुछ में जमानत मिल चुकी है, जबकि बाकी मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है।
अकृति के परिवार ने हाईकोर्ट के फैसले पर राहत जताई है। उनके पिता का कहना है कि परिवार को शुरू से विश्वास था कि उनकी बेटी ने कोई गलत काम नहीं किया है और अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली है। वहीं, अकृति की कानूनी टीम ने अदालत के सामने यह दलील दी कि उपलब्ध सामग्री में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं था, जिससे उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर निरोधात्मक हिरासत में रखना उचित ठहराया जा सके।
इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शनों और उन पर लगाए जाने वाले कड़े कानूनी प्रावधानों को लेकर भी बहस तेज कर दी है। सवाल यह है कि किसी प्रदर्शन में मौजूद व्यक्ति की भूमिका तय करते समय क्या केवल गवाहों के आरोप पर्याप्त हैं या फिर उसके खिलाफ प्रत्यक्ष और ठोस सबूत भी होना चाहिए। हाईकोर्ट के इस फैसले से यह संदेश जरूर गया है कि निरोधात्मक हिरासत जैसे कठोर कदमों के लिए प्रशासन को अपने फैसले के पीछे मजबूत आधार और विश्वसनीय सामग्री रखनी होगी।
अकृति चौधरी मामले में अदालत का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता, विरोध प्रदर्शन का अधिकार और राज्य की सुरक्षा संबंधी शक्तियों के बीच संतुलन का सवाल सामने आता है। कोर्ट ने उपलब्ध सामग्री की जांच करने के बाद NSA हिरासत को रद्द किया और मुआवजे का आदेश दिया। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि अकृति के खिलाफ दर्ज अन्य मामलों में अदालतें क्या फैसला करती हैं।
फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश उत्तर प्रदेश प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। किसी व्यक्ति के खिलाफ NSA जैसे कानून का इस्तेमाल करने से पहले आरोपों और उपलब्ध सबूतों की मजबूती को लेकर पूरी सावधानी बरतनी होगी। अकृति चौधरी की हिरासत रद्द करने और अधिकारियों के वेतन से ₹5 लाख मुआवजा दिलाने के आदेश ने इस मामले को एक बड़े कानूनी और अधिकारों से जुड़े मुद्दे में बदल दिया है।



