पश्चिम बंगाल में प्राचीन मंदिरों और मठों के जीर्णोद्धार के लिए 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा पर सियासी बहस शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अगले दो वर्षों में पुराने मंदिरों के नवीनीकरण के लिए ‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ बनाने का ऐलान किया है। इस घोषणा पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने सवाल उठाते हुए पूछा कि जब राज्य के सभी धर्मों के लोग टैक्स देते हैं, तो सरकारी धन केवल मंदिरों के लिए ही क्यों खर्च किया जा रहा है।
अधीर रंजन चौधरी ने रविवार, 8 नवंबर को इस योजना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में मंदिरों के अलावा सैकड़ों मस्जिदें, चर्च और गुरुद्वारे भी हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार सिर्फ मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए पैसा क्यों दे रही है। उनके मुताबिक, सरकारी खजाने में सभी धर्मों के लोगों का योगदान होता है, इसलिए सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में सभी समुदायों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार चलाने का मतलब यह नहीं है कि आम लोगों से मिले पैसे को अपनी इच्छा के अनुसार कहीं भी खर्च कर दिया जाए। उन्होंने धार्मिक आधार पर भेदभाव और नफरत का माहौल बनने को लेकर भी चिंता जताई। अधीर रंजन के मुताबिक, बंगाल की सरकार को सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल मंदिरों पर खर्च करने से यह संदेश जा सकता है कि सरकार एक ही धर्म के लोगों के लिए काम कर रही है।
दरअसल, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 6 नवंबर को नदिया जिले के अरंगघाटा में एक सामुदायिक काली पूजा के उद्घाटन के दौरान इस योजना की घोषणा की थी। उन्होंने बताया था कि अगले दो वर्षों में 1,000 करोड़ रुपये खर्च करके राज्य के प्राचीन मंदिरों और मठों का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इस पहल को ‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, योजना के तहत देवोत्तर संपत्तियों, ट्रस्टों और सार्वजनिक संस्थाओं के प्रबंधन वाले पुराने धार्मिक स्थलों को शामिल किया जाएगा, जबकि निजी संपत्तियां इसके दायरे में नहीं होंगी।
इस योजना का मकसद पुराने धार्मिक स्थलों को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें तीर्थयात्रा और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित करना है। प्रस्तावित सर्किट में मायापुर, नवद्वीप, तारापीठ, तारकेश्वर, कालीघाट, दक्षिणेश्वर और कूचबिहार के मदन मोहन जिउ मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों का नाम सामने आया है। हालांकि, किन मंदिरों पर कितना पैसा खर्च होगा और काम किस तरह पूरा किया जाएगा, इसकी विस्तृत सूची अभी सामने नहीं आई है।
मुख्यमंत्री ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आगामी त्योहारों की तैयारियों का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि जगद्धात्री पूजा के दौरान चंदननगर और कृष्णनगर को विशेष रूप से सजाया जाएगा। वहीं, रास पूर्णिमा के अवसर पर नवद्वीप, शांतिपुर और कूचबिहार में विशेष सजावट की योजना है। उन्होंने 22 नवंबर को नवद्वीप जाने और धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने की बात भी कही थी।
इस घोषणा के बाद अब मंदिरों के संरक्षण और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार की योजना प्राचीन धार्मिक धरोहरों के जीर्णोद्धार और तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, वहीं अधीर रंजन चौधरी ने सवाल उठाया है कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में दूसरे धर्मों के धार्मिक स्थलों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। फिलहाल, सरकार की ओर से अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों के लिए ऐसी किसी समान योजना की घोषणा सामने नहीं आई है।