Site icon Prsd News

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में ISIS ठिकानों पर की एयर स्ट्राइक, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में बढ़ा तनाव

download 2

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद और सुरक्षा तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम में अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्रों में कथित तौर पर आतंकी संगठन ISIS-खुरासान (आईएसआईएस-के) के ठिकानों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और हवाई हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन हमलों ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है तथा पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का दावा है कि पाकिस्तान की सीमा के भीतर सक्रिय ऐसे ठिकानों पर कार्रवाई की गई है, जिनका संबंध ISIS से जुड़े चरमपंथी तत्वों से था। बताया जा रहा है कि इन संगठनों की गतिविधियां न केवल अफगानिस्तान बल्कि पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों के लिए भी खतरा बनती जा रही थीं। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने अफगान सीमा से लगे इलाकों में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने का दावा किया था। पाकिस्तान का कहना था कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों को रोकना था, जबकि अफगानिस्तान ने उन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी निंदा की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई और अब अफगानिस्तान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई को क्षेत्रीय तनाव में बड़ी वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों के केंद्र रहे हैं। इन क्षेत्रों में विभिन्न आतंकी संगठनों की मौजूदगी और सीमा पार आवाजाही ने सुरक्षा चुनौतियों को जटिल बना दिया है। ISIS-खुरासान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य कट्टरपंथी गुटों की गतिविधियों ने दोनों देशों के लिए गंभीर खतरे पैदा किए हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का प्रभाव केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हाल के महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को लेकर कई देशों और वैश्विक संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इससे आतंकवाद विरोधी अभियानों के साथ-साथ क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच आधिकारिक स्तर पर संवाद और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

Exit mobile version