राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने विकसित भारत युवा संवाद 2026 के उद्घाटन समारोह में युवाओं से अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज़ादी से पहले भारत ने लंबी और कठिन लड़ाइयाँ देखीं, जब हमारे पूर्वजों ने उपनिवेशवाद, असमानता और अन्याय का सामना किया। डोवाल ने यह स्पष्ट किया कि इतिहास का “बदला” लेने का अर्थ हिंसा या प्रतिशोध नहीं है, बल्कि देश को हर क्षेत्र में सशक्त और विकसित बनाना है — चाहे वह सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विज्ञान-तकनीक, शिक्षा या सामाजिक विकास हो।
अपने संबोधन में डोवाल ने महात्मा गांधी, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदानों का हवाला देते हुए कहा कि हमारी आज़ादी और प्रगति उनके संघर्षों का परिणाम है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इतिहास से सीख लेकर अपने देश को हर क्षेत्र में मजबूत बनाएं, और इसे केवल सामरिक या आर्थिक शक्ति तक सीमित न समझें, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विकसित करें।
NSA ने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता सदियों से शांति, सहिष्णुता और समावेशिता की रही है, और हमें अपने अतीत से सीख लेकर भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सशक्त राष्ट्र तैयार करना चाहिए। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि देश के विकास में योगदान देने का सबसे बड़ा तरीका है कि वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों का पालन करते हुए, शिक्षा और कौशल में निपुण हों, ताकि भारत हर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर सम्मानित राष्ट्र बन सके।
डोवाल के अनुसार, इतिहास का अध्ययन और उसमें छुपी सीख केवल स्मरण और प्रेरणा का माध्यम है। यह हमें याद दिलाता है कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, रणनीति और समर्पण के साथ ही हम अपने देश को महान बना सकते हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपनी ऊर्जा और कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए करें और अतीत की चुनौतियों से डरने की बजाय उन्हें सशक्त बनाने का अवसर मानें।
इस कार्यक्रम में मौजूद युवाओं ने NSA के संदेश को उत्साहजनक और प्रेरणादायक बताया, और कहा कि यह युवा नेतृत्व को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
