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रामपुर में अखिलेश यादव और आज़म खान की मुलाकात से सियासी हलचल, पुराने मतभेदों पर लगी ‘मुलायम’ मरहम

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन बेहद अहम साबित हुआ, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर के कद्दावर मुस्लिम चेहरा आज़म खान से उनके घर जाकर मुलाकात की। यह मुलाकात लंबे समय से चली आ रही सपा की अंदरूनी खींचतान और आज़म खान की नाराज़गी के बीच हुई, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

रामपुर में हुई यह मुलाकात करीब 1 घंटे 40 मिनट तक चली। अखिलेश यादव के आगमन से पहले आज़म खान के घर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। बताया जा रहा है कि आज़म खान ने साफ कहा था कि वे अखिलेश से केवल व्यक्तिगत तौर पर मिलना चाहते हैं, न कि किसी बड़े सपा प्रतिनिधिमंडल के साथ। अखिलेश ने उनकी यह शर्त मानी और अकेले ही मुलाकात के लिए पहुंचे।

मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत हुई। सूत्रों के मुताबिक, आज़म खान ने पार्टी से जुड़े स्थानीय नेताओं और संगठनात्मक फैसलों को लेकर अपनी नाराज़गी जाहिर की, जबकि अखिलेश यादव ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी में उनकी अहमियत बरकरार है और सपा मुस्लिम समाज के हितों के लिए पहले की तरह ही मजबूती से खड़ी है।

इस मुलाकात की सबसे चर्चित झलक वह थी, जब अखिलेश यादव और आज़म खान साथ-साथ चलते हुए दिखाई दिए। अखिलेश ने आज़म का हाथ थामा और साथ चलकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। इस दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसे सपा समर्थक “एकता का प्रतीक” बता रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस भेंट के पीछे सपा की रणनीति स्पष्ट है — आगामी लोकसभा उपचुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिम वोट बैंक को फिर से एकजुट करना। रामपुर जैसे इलाकों में आज़म खान की पकड़ अभी भी मजबूत है, और पार्टी को यह अहसास है कि उनकी नाराज़गी से नुकसान हो सकता है।

सपा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह एक “सौहार्दपूर्ण मुलाकात” थी, जिसमें दोनों नेताओं ने समाजवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं आज़म खान के करीबी सूत्रों ने बताया कि बातचीत “सकारात्मक माहौल” में हुई और दोनों नेताओं के बीच अब कोई कड़वाहट नहीं बची।

इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह सपा के लिए “डैमेज कंट्रोल” की कोशिश है, जबकि अन्य इसे पार्टी में पुरानी एकजुटता की वापसी मान रहे हैं।

कुल मिलाकर, रामपुर की यह तस्वीर — जिसमें अखिलेश और आज़म साथ दिखे — न सिर्फ सपा के भीतर नई उम्मीद जगाती है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया संदेश भी देती है कि सपा अब फिर से पुराने चेहरों और गठजोड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है।

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