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अलीगढ़ में लोन रिकवरी के दबाव में मजदूर की दर्दनाक मौत, परिवार ने अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया

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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में लोन की किस्त न चुका पाने के कारण बैंक वसूली टीम की ओर से घर पहुंचने के बाद 55 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर इस्माइल की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिससे इलाके में तनाव और विवाद की स्थिति बन गई है। मृतक के परिजन आरोप लगा रहे हैं कि राजस्व विभाग के अधिकारियों ने घर पर जबरन वसूली के प्रयास किए और कठोर व्यवहार व धमकी दी, जिससे इस्माइल को गंभीर मानसिक तनाव हुआ और उनका स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वसूली टीम द्वारा कोई गलत व्यवहार नहीं किया गया और इस्माइल ने नोटिस मिलने के बाद स्वयं तहसील कार्यालय जाने का निर्णय लिया था।

परिवार के अनुसार, इस्माइल ने 2014 में एक निजी बैंक से एक लाख रुपये का लोन लिया था और अपने 50 वर्ग मीटर के घर को गिरवी रखा था, जिसे वे लंबे समय तक किस्तों में वापस कर रहे थे। लेकिन हाल ही में वित्तीय तंगी के चलते एक किस्त नहीं जमा कर पाए, जिससे बैंक ने अदालत से रिकवरी आदेश हासिल किया और राजस्व विभाग को इस आदेश को लागू करने के लिए कहा गया। उस दिन वसूली टीम जब जीवनगढ़ इलाके में उनके घर आई, तो उन्होंने “कठोर व धमकी भरी भाषा” में बातचीत की और इसे लेकर इस्माइल को अत्यधिक तनाव का सामना करना पड़ा। वहीं, अधिकारियों का दावा रहा कि टीम ने आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया और इस्माइल “स्वयं” तहसील गए थे।

तबीयत बिगड़ने पर इस्माइल को तहसील कार्यालय से अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘हार्ट अटैक’ बताया गया है। परिजनों ने इस घटना को हत्या करार देते हुए बन्ना देवी पुलिस थाने में राजस्व अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है तथा 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी की है। परीक्षा जारी है और स्थानीय पुलिस व प्रशासन मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं।

इस घटना ने उन चिंताओं को फिर से उजागर किया है, जहां लोन रिकवरी के दबाव में कमजोर व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को भारी तनाव का सामना करना पड़ता है, और उनका जीवन संकट में पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कर्ज वसूली के दौरान पारदर्शी, संवेदनशील और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन होना बेहद जरूरी है ताकि गरीब लोगों के साथ उत्पीड़न जैसी स्थितियां न बनें।

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