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बंगाल चुनाव से पहले अमित शाह का बड़ा दांव—UCC, सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर सख्त नीति का वादा

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना चुनावी संकल्प पत्र जारी कर राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने पार्टी का विज़न पेश करते हुए कई बड़े वादे किए। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य में सत्ता में आने के बाद भाजपा “रामराज्य” की स्थापना की दिशा में काम करेगी और जनता को विकास, सुरक्षा और समान अधिकार सुनिश्चित करेगी।

अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ तौर पर कहा कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार बनती है तो राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को छह महीने के भीतर लागू किया जाएगा। उनका कहना था कि यह कानून सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करेगा, जिससे समाज में समानता और पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने सीमाओं की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया और कहा कि घुसपैठ के खिलाफ “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” की नीति अपनाई जाएगी।

संकल्प पत्र में महिलाओं, युवाओं और किसानों को ध्यान में रखते हुए कई योजनाओं का जिक्र किया गया है। पार्टी ने दावा किया कि यह घोषणापत्र राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। अमित शाह ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में राज्य की वर्तमान सरकार ने विकास को पीछे छोड़ दिया, जिससे जनता में निराशा का माहौल बना है।

राजनीतिक बयानबाजी के दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद पुरानी योजनाओं को बंद नहीं करेगी, बल्कि उन्हें और बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने ममता बनर्जी के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें भाजपा सरकार बनने पर खान-पान से जुड़े प्रतिबंधों की बात कही गई थी। शाह ने इसे “भ्रामक प्रचार” बताते हुए जनता से तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की अपील की।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भाजपा ने अपने घोषणापत्र में कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों को प्रमुखता देकर चुनावी रणनीति तैयार की है। UCC और सीमा सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दे सीधे तौर पर राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े हैं, जिससे यह चुनाव केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रह जाता बल्कि इसका प्रभाव देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, भाजपा का यह संकल्प पत्र पश्चिम बंगाल चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा सेट करता नजर आ रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन वादों का जनता पर कितना असर पड़ता है और क्या भाजपा इन मुद्दों के दम पर सत्ता में वापसी कर पाती है या नहीं।

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