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चिकन नेक पर अमित शाह का बड़ा फोकस, सीमा सुरक्षा की होगी हाईलेवल समीक्षा

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के 2 दिवसीय दौरे पर हैं, जहां उनका मुख्य फोकस देश की सीमा सुरक्षा, बॉर्डर मैनेजमेंट और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर है। सिलीगुड़ी क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहीं स्थित संकरा गलियारा देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ता है। इसी भौगोलिक और सामरिक महत्व के कारण गृह मंत्री के इस दौरे को खास माना जा रहा है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। यह करीब 60 किलोमीटर लंबा और लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा संकरा भू-भाग है, जिसके जरिए पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी देश के बाकी हिस्सों से बनी रहती है। इस क्षेत्र के आसपास बांग्लादेश, नेपाल और भूटान की सीमाएं हैं, जबकि उत्तर दिशा में तिब्बत क्षेत्र स्थित है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति के दौरान इस कॉरिडोर की सुरक्षा और यातायात एवं संपर्क व्यवस्था को बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम हो जाता है।

दौरे के पहले दिन अमित शाह सशस्त्र सीमा बल यानी SSB के फ्रंटियर मुख्यालय पहुंचेंगे। यहां वह सीमा सुरक्षा से जुड़ी कई परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। इन योजनाओं का उद्देश्य सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना, सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाना और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को विस्तार देना है। गृह मंत्री SSB के जवानों से मुलाकात कर सीमावर्ती क्षेत्रों में मौजूद चुनौतियों और सुरक्षा तैयारियों की जानकारी भी लेंगे।

SSB भारत-नेपाल की करीब 1,751 किलोमीटर लंबी और भारत-भूटान की करीब 699 किलोमीटर लंबी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही और स्थानीय गतिविधियों के कारण सुरक्षा एजेंसियों के सामने अलग तरह की चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में खुफिया सूचनाओं, स्थानीय स्तर पर समन्वय, आधुनिक निगरानी व्यवस्था और तकनीकी संसाधनों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

दौरे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 22 अगस्त को होने वाली हाईलेवल बैठक मानी जा रही है, जिसकी अध्यक्षता खुद अमित शाह करेंगे। इस बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा और बॉर्डर मैनेजमेंट से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी। बैठक में सुरक्षा बलों, गृह मंत्रालय और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई है। इसमें मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की प्रगति और अलग-अलग एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हो सकती है।

सीमा सुरक्षा की रणनीति अब केवल जवानों की तैनाती तक सीमित नहीं रह गई है। ड्रोन, सेंसर, कैमरे, आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम और डेटा आधारित निगरानी जैसे संसाधन भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में सिलीगुड़ी दौरे के दौरान इन तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर भी विशेष ध्यान रहने की संभावना है।

अमित शाह के कार्यक्रम में नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी शामिल है। ये कानून पुराने औपनिवेशिक दौर के आपराधिक कानूनों की जगह 1 जुलाई 2024 से लागू हुए थे। प्रदर्शनी के माध्यम से इनके प्रमुख प्रावधानों और नई कानूनी व्यवस्था की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

सिलीगुड़ी और ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए अमित शाह का यह दौरा केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा है। इसका सीधा संबंध पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत की सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से है। ऐसे में 22 अगस्त को होने वाली हाईलेवल बैठक से सीमा सुरक्षा और बॉर्डर मैनेजमेंट को लेकर आगे की रणनीति पर महत्वपूर्ण दिशा तय होने की उम्मीद है।

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