उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ में बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में बीजेपी तीसरी बार सरकार बनाती है, तो राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। अमित शाह ने यह भी कहा कि देश के कई राज्यों में UCC पहले ही लागू हो चुका है और उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू किया जाएगा।
अमित शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर संगठन को मजबूत करना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आपसी नाराजगी और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पीछे छोड़कर चुनाव की तैयारी में जुटने की अपील की। शाह ने भरोसा जताया कि बीजेपी 2027 में एक बार फिर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाएगी।
अपने संबोधन में अमित शाह ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की पार्टी अगले 30 वर्षों तक उत्तर प्रदेश में सरकार नहीं बना पाएगी। शाह ने दावा किया कि प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को दोबारा सत्ता में आने का मौका नहीं देगी। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है।
अमित शाह के UCC वाले बयान पर अखिलेश यादव से भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर उन्होंने कहा, “बड़ी देर कर दी, मेहरबां आते-आते।” अखिलेश की इस संक्षिप्त टिप्पणी को UCC लागू करने के बीजेपी के वादे पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।
समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में समान नागरिक कानून की व्यवस्था करना है। फिलहाल इन विषयों पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।
देश में उत्तराखंड ने 2024 में UCC कानून पारित किया था। इसके बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी इस दिशा में कानून बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अलग-अलग राज्यों में कानून की स्थिति और उसके प्रावधानों में अंतर हो सकता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में UCC लागू करने के लिए कानून का प्रारूप, उसके प्रावधान और विधायी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे।
लखनऊ में हुई बीजेपी की कार्यसमिति बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक का मकसद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की रणनीति तैयार करना और कार्यकर्ताओं को चुनावी अभियान के लिए सक्रिय करना था।
अमित शाह का यह ऐलान साफ करता है कि UCC आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगा। हालांकि, राज्य में इसे लागू करने का वास्तविक स्वरूप क्या होगा और कानून में कौन-कौन से प्रावधान शामिल किए जाएंगे, यह आगे की विधायी प्रक्रिया और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले प्रस्ताव पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस बयान के बाद UCC को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है।
