अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तर भारत और गुजरात के बीच तेज कनेक्टिविटी देने वाली बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। करीब 1,257 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से होकर गुजरता है। इसका बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है और बाकी हिस्सों को दिसंबर 2026 तक चालू करने की योजना बताई गई है। कॉरिडोर के जरिए उत्तर भारत को गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
इस एक्सप्रेसवे की खास बात यह है कि दिल्ली-एनसीआर से भी इसे कई रास्तों के जरिए जोड़ा जा सकता है। दिल्ली से आने वाले वाहन कुंडली-मानेसर-पलवल यानी KMP एक्सप्रेसवे, NH-44 और ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे के रास्ते सिरसा-डबवाली इंटरचेंज तक पहुंच सकते हैं। यहां से अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर पर प्रवेश किया जा सकता है। इससे दिल्ली से राजस्थान और गुजरात की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को मौजूदा व्यस्त मार्गों के मुकाबले एक वैकल्पिक हाईस्पीड रूट मिलेगा।
दिल्ली से अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर तक पहुंचने का एक दूसरा रास्ता दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के जरिए भी बनता है। दिल्ली से पंजाब की ओर जाने वाला यह एक्सप्रेसवे आगे संगरूर और मोगा क्षेत्र के पास लुधियाना-बठिंडा एक्सप्रेसवे लिंक से जुड़ता है। इस कनेक्टिविटी के जरिए वाहन बठिंडा या टिब्बा क्षेत्र से अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे पर प्रवेश कर सकते हैं। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 670 किलोमीटर है और यह दिल्ली को पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर से जोड़ने के लिए विकसित किया जा रहा है।
दिल्ली से जामनगर की मौजूदा सड़क यात्रा में जयपुर और उदयपुर-अहमदाबाद जैसे मार्गों के कारण करीब 24 से 26 घंटे तक लग सकते हैं। नए कनेक्टिविटी नेटवर्क के जरिए लगभग 1,200 किलोमीटर की यात्रा को करीब 15 से 16 घंटे में पूरा करने का अनुमान बताया गया है। वहीं अमृतसर से जामनगर के बीच की दूरी पुराने मार्ग की करीब 1,430 किलोमीटर से घटकर लगभग 1,316 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा का समय करीब 26 घंटे से घटकर लगभग 13 घंटे होने की उम्मीद है।
अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में है। करीब 637 किलोमीटर का मार्ग राज्य से होकर गुजरता है। यह हनुमानगढ़, सूरतगढ़, बीकानेर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर, सांचौर और जालोर जैसे क्षेत्रों को जोड़ता है। राजस्थान में कई हिस्से पहले ही यातायात के लिए खोले जा चुके हैं और हनुमानगढ़ से जालोर तक का बड़ा हिस्सा चालू बताया गया है।
हरियाणा में कॉरिडोर का करीब 85 किलोमीटर हिस्सा मंडी डबवाली से सिरसा और चौटाला क्षेत्र तक जाता है। पंजाब में करीब 155 किलोमीटर का हिस्सा कपूरथला के टिब्बा क्षेत्र से मोगा, धर्मकोट और बठिंडा होते हुए संगत कलां तक जाता है। गुजरात में करीब 380 किलोमीटर का मार्ग थराद, वासरदा, राधनपुर, संतलपुर, मालिया होते हुए जामनगर तक पहुंचता है। इस तरह यह कॉरिडोर चार राज्यों के बीच लंबी दूरी की सड़क कनेक्टिविटी को एक ही नेटवर्क में जोड़ता है।
इस परियोजना का महत्व सिर्फ यात्रियों के लिए समय बचाने तक सीमित नहीं है। कॉरिडोर पंजाब और हरियाणा के कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्रों को राजस्थान और गुजरात के बंदरगाहों से जोड़ने में मदद करेगा। कांडला, मुंद्रा और जामनगर जैसे प्रमुख औद्योगिक एवं पोर्ट क्षेत्रों तक माल पहुंचाने में दूरी और परिवहन समय कम होने की उम्मीद है। राजस्थान के बीकानेर के खाद्य उत्पाद, जोधपुर का हस्तशिल्प और जालोर का ग्रेनाइट जैसे उत्पादों को भी पश्चिमी तट के बाजारों तक पहुंचने में बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिल सकती है।
कॉरिडोर का एक बड़ा हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया गया है। इसकी अधिकतम डिजाइन गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार अमृतसर-बठिंडा-जामनगर कॉरिडोर का उद्देश्य उत्तर भारत के भू-आवेष्ठित क्षेत्रों को गुजरात के समुद्री बंदरगाहों से जोड़ना और यात्रा दूरी तथा समय कम करना है। NHAI ने अपने दस्तावेज में इसे करीब 1,224 किलोमीटर के कॉरिडोर के रूप में दर्ज किया है, जबकि मौजूदा परियोजना चरणों और कनेक्टिविटी को मिलाकर अलग-अलग रिपोर्टों में लंबाई के आंकड़े अलग हो सकते हैं।
इस कॉरिडोर का औद्योगिक महत्व भी काफी बड़ा है। बठिंडा की एचएमईएल रिफाइनरी, राजस्थान के बाड़मेर में एचपीसीएल की रिफाइनरी और गुजरात के जामनगर के रिफाइनरी क्षेत्र को इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। गुजरात के बंदरगाहों तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही आसान होने से लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को फायदा मिलने की उम्मीद है। साथ ही राजस्थान के पर्यटन क्षेत्रों को भी उत्तर भारत से बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।
अमृतसर-जामनगर कॉरिडोर को KMP, ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे दूसरे बड़े मार्गों से जोड़ने से दिल्ली-एनसीआर के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है। दिल्ली से राजस्थान, गुजरात, पंजाब और पश्चिमी भारत की ओर जाने वाले वाहनों को अलग-अलग कनेक्टिविटी विकल्प मिलेंगे। हालांकि, अलग-अलग सेक्शन के पूरी तरह चालू होने और वास्तविक यात्रा समय पर ट्रैफिक, प्रवेश बिंदु, टोल और स्थानीय कनेक्टिविटी जैसे कारकों का भी असर पड़ेगा।