बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी है और उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि यह मामला अनंत सिंह का अपना है और वह ऐसे लोगों पर ध्यान नहीं देते। नीरज के इस बयान को मामले में आए बड़े कानूनी घटनाक्रम के बीच अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पटना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को जमानत दी गई थी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने जमानत देते समय कथित अपराध की गंभीरता और अनंत सिंह के आपराधिक रिकॉर्ड पर पर्याप्त विचार नहीं किए जाने पर सवाल उठाए। अदालत ने बिहार पुलिस को मामले की जांच चार महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश भी दिया है।
नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अदालत ने जो निर्णय दिया है, उसका सामना अनंत सिंह को खुद करना है। उन्होंने इस मामले से खुद को अलग रखते हुए कहा कि वह ऐसे लोगों पर ध्यान नहीं देते। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि अदालत के फैसले से न्यायपालिका पर भरोसा मजबूत हुआ है।
दूसरी ओर, अनंत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वह अदालत के निर्देश के अनुसार सरेंडर करेंगे। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि आगे उन्हें फिर से जमानत मिल सकती है। हालांकि, उन्होंने नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड में फंसाने के पीछे नीरज का हाथ है। ये अनंत सिंह के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला 30 अक्टूबर 2025 का है, जब बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोकामा में दो राजनीतिक गुटों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। वह जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे। मामले में अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया और पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया था।
दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि झड़प के दौरान उन्हें गोली मारी गई और फिर गाड़ी से कुचल दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दिल और फेफड़ों में गंभीर चोटों से उत्पन्न स्थिति बताया गया था। अनंत सिंह ने इस मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश जमानत से जुड़ा है, इसे मामले में उनकी दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अनंत सिंह की मुश्किलें राजनीतिक मोर्चे पर भी बढ़ी हैं। जनता दल यूनाइटेड ने कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता पर दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग भी की है।
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करना होगा। साथ ही बिहार पुलिस को चार महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में आगे की सुनवाई जांच की प्रगति के बाद होगी। फिलहाल नीरज कुमार के बयान और अनंत सिंह के आरोपों के बीच बिहार की राजनीति में यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
