विकासशील असम में होने वाले Priyanka Gandhi द्वारा नेतृत्व किए जा रहे चुनावी अभियान के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupen Kumar Borah ने कांग्रेस छोड़कर Bharatiya Janata Party में शामिल होने का ऐलान किया। उन्होंने 16 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दिया और 22 फरवरी को भाजपा का दामन थामा, जिससे असम विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को सियासी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
भूपेन बोरा ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस में फंड की कमी और रणनीति संबंधी असंतोष के कारण पार्टी से त्यागपत्र दिया और महसूस किया कि कांग्रेस चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं जुटा पा रही है, जिससे पार्टी की स्थिति कमजोर दिखती है। हालांकि कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि बोरा के जाने से पार्टी को कोई खास नुकसान नहीं होगा और संगठन मजबूत है।
ऐसे में असम में अपने नुकसान की भरपाई करने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने राज्य का दौरा तेज कर दिया है। उन्होंने पार्टी के ब्लॉक अध्यक्षों और पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं, चुनावी तैयारियों पर मंथन किया, और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए रणनीति तैयार की।
प्रियंका गांधी का लक्ष्य है कि कांग्रेस जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं तक सशक्त रूप से पहुंचे, उम्मीदवारों के चयन में पारदर्शिता लाए, तथा असम के मतदाताओं को यह विश्वास दिलाए कि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और विकास एजेंडा के साथ चुनाव मैदान में मजबूत स्थिति में है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस अब भूपेन बोरा के जाने के प्रभाव को कम करने के लिए पार्टी को एकजुट रखेगी, कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लेने जैसे कदम उठाएगी, और असम के मतदाताओं को यह संदेश देगी कि वह राजनीतिक स्थिरता और विकास की दिशा में काम करेगी, जिससे पार्टी नुकसान की भरपाई कर सके।
