
असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग जिले में जमीन विवाद और जनजातीय विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप लेने के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, जिसके कारण प्रशासन ने सेना को प्रभावित इलाकों में तैनात कर दिया है ताकि कानून-व्यवस्था को फिर से बहाल किया जा सके। पिछले दो दिनों से जारी तनाव में अब तक कम से कम दो लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं, जिनमें कई पुलिस और सुरक्षा बल के जवान भी शामिल हैं। इस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों के साथ सेना की तैनाती की गई है ताकि किसी भी और अनियंत्रित घटना को रोका जा सके।
हिंसा की शुरुआत स्थानीय भूमि विवाद को लेकर हुई, जहाँ कार्बी जनजातीय समुदाय ने आरोप लगाया कि कई बाहरी लोग, विशेषकर बिहार से आए लोग, उनके परंपरागत Village Grazing Reserve (VGR) और Professional Grazing Reserve (PGR) भूमि पर अवैध रूप से बसे हुए हैं। यह भूमि संविधान की छठी अनुसूची के तहत आदिवासी समुदायों की स्वायत्तता और अधिकारों की रक्षा के लिए संरक्षित है। आदिवासी नेताओं ने इन “अवैध अतिक्रमणकारियों” को हटाने की मांग की और इसके लिए लंबे समय से भूख हड़ताल भी कर रहे थे।
हिंसा तब तूल पकड़ गई जब प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। मंगलवार तड़के पुलिस ने भूख हड़ताल कर रहे कुछ प्रदर्शनकारियों को अस्पताल ले जाने के नाम पर हटाया, जिससे नाराज भीड़ ने उग्र रूप ले लिया और पथराव, आगजनी और पत्थरबाज़ी शुरू हो गई। इससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हो गईं, जिसमें कई सुरक्षा कर्मी घायल हुए और कई दुकानों व घरों को आग के हवाले कर दिया गया।
प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू, कर्फ्यू जैसा नियंत्रण और इंटरनेट सेवाओं का निलंबन तक करना पड़ा, जिससे बाहरी दुनिया से संपर्क सीमित किया गया और अफवाहों के फैलने को रोकने का प्रयास किया गया। हिंसा की तीव्रता के कारण पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले उपयोग करने पड़े, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी।
ऐसे तनावपूर्ण हालात में सुरक्षित स्थिति बनाए रखने और आगे अनिश्चित घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस बलों के साथ-साथ भारतीय सेना की टुकड़ियाँ भी तैनात की गईं। सेना ने प्रभावित इलाकों में फ़्लैग मार्च और चौकसी जारी रखी है, तथा प्रशासन के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था बहाल करने में सहायता कर रही है। अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल स्थिति में कुछ शांति नजर आ रही है, लेकिन तनाव अभी भी बना हुआ है और सुरक्षा बल अलर्ट मोड में हैं।
असम के पुलिस महानिदेशक हरमीत सिंह और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं और उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे हिंसा में भाग न लें और बातचीत के माध्यम से ही समस्याओं को सुलझाएं। उन्होंने समुदाय के बुजुर्गों से भी यह प्रयास करने का आग्रह किया है कि युवा हिंसक गतिविधियों से दूर रहें। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ जल्द ही कठोर कार्रवाई और गिरफ्तारी की जाएगी जब स्थिति स्थिर हो जाएगी।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी स्थिति पर करीबी नजर रखने के निर्देश दिए हैं और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकता को शांतिपूर्ण समाधान और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा बताई है। प्रशासन का यह भी कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आएगी, तब तक सेना और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती जारी रहेगी।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती है बल्कि असम के आदिवासी अधिकार, भूमि विवाद और सामाजिक संतुलन जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी सामने लाता है। शासन-प्रशासन की अगली रणनीति और समुदायों के बीच संवाद अब मुख्य रूप से तनाव को कम करने और सामान्य जीवन की बहाली पर केन्द्रित रहेगी।



