उत्तराखंड के हरिद्वार में होली 2026 का पर्व इस बार कुछ खास अंदाज़ में मनाया गया, जहाँ पतंजलि योगपीठ के प्रमुख योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने अनुयायियों के साथ पारंपरिक रंगों की जगह फूलों से होली खेली और एक सकारात्मक संदेश दिया। सुबह से ही पतंजलि परिसर श्रद्धालुओं से भर गया था, जहाँ फूलों की पुष्पवर्षा, भजन-कीर्तन और देशभक्ति गीतों की गूँज के बीच उत्सव का माहौल भक्तिमय और आनंद से सराबोर रहा। लोगों ने मिलकर फूलों के रंगों से एक-दूसरे के चेहरों को सजाया और होली के पर्व को प्राकृतिक, सुरक्षित तथा सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाया।
बाबा रामदेव ने मंच से संबोधन करते हुए विश्व के वर्तमान संवेदनशील वैश्विक हालात पर भी गहराई से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज दुनिया ऐसे समय से गुजर रही है जहाँ युद्ध, संघर्ष और तनाव आम लोगों का जीवन प्रभावित कर रहे हैं और इस समय आवश्यकता शांति, संयम और एकता की है। उन्होंने बताया कि रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य-पूर्व में इज़राइल-ईरान तनाव और अन्य वैश्विक विवाद चिंता का विषय हैं तथा इनसे बचने के लिए सभी देशों को आपसी सहयोग और संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए। बाबा रामदेव ने कहा कि अगर मानवता को सुरक्षित रखना है तो परमाणु हथियारों को खत्म करना और विश्वव्यापी योग और शांति की संस्कृति को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि योग और आत्मशांति ही मानवता को वास्तविक बचाव प्रदान कर सकते हैं, न कि युद्ध और हिंसा। रामदेव ने भारत के लोगों से अपील की कि वे धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एकता, प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाएँ, क्योंकि जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के नाम पर विभाजन किसी भी राष्ट्र की प्रगति को रोक सकता है। इसके साथ ही उन्होंने देश के बाहर भी शांति-संवर्धक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में उन्होंने सभी से प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल रंगों का प्रयोग कर सुरक्षित होली खेलने की अपील की, ताकि पर्यावरण को कोई हानि न पहुँचे और लोगों का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे। बाबा रामदेव ने होली को प्रेम, सद्भाव और अच्छाई की विजय का प्रतीक बताया और कहा कि यही मूल भावना इस त्योहार को इतना विशेष बनाती है। पतंजलि योगपीठ में फूलों की होली और भजन-कीर्तन की झंकार के बीच श्रद्धालु इस संदेश को उत्साह और श्रद्धा से ग्रहण करते नजर आए।
इस प्रकार, हरिद्वार में हुई इस अनोखी फूलों की होली न केवल सांस्कृतिक उत्सव का रूप रही, बल्कि बाबा रामदेव के विश्व शांति, एकता और योग के संदेश ने इसे एक आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश वाला पर्व भी बना दिया।
