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बांग्लादेश के लिए कपूरथला में तैयार हुई खास ट्रेन, पहली बार LHB कोच में किए गए कई बदलाव

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भारत ने बांग्लादेश रेलवे के लिए कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री में खास डिजाइन वाली LHB ट्रेन तैयार की है। 12 अगस्त को इस ट्रेन के पहले रेक को रोलआउट किया जाना है। इसमें बांग्लादेश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई ऐसे बदलाव किए गए हैं, जो सामान्य भारतीय LHB कोचों से अलग हैं। यह भारत और बांग्लादेश के बीच रेलवे क्षेत्र में सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पहले रेक में कुल 19 कोच शामिल हैं। इनमें 3 AC Sleeper, 3 AC Chair Car, 11 Non-AC Chair Car और 2 Power Car हैं। इन कोचों को बांग्लादेश रेलवे की परिचालन व्यवस्था और यात्रियों की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया है। डिजाइन में कई नए बदलाव किए गए हैं, जिनमें से कुछ LHB कोचों में पहली बार इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

इन कोचों की एक खास बात इनका इलेक्ट्रिकल सिस्टम है। भारतीय रेलवे के सामान्य कोचों में जहां 750 वोल्ट की व्यवस्था इस्तेमाल होती है, वहीं बांग्लादेश के लिए तैयार किए गए इन कोचों में 415 वोल्ट का इलेक्ट्रिकल सिस्टम लगाया गया है। यह बदलाव बांग्लादेश रेलवे की मौजूदा जरूरतों और संचालन व्यवस्था को ध्यान में रखकर किया गया है।

यह पहली बार नहीं है जब कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री ने बांग्लादेश के लिए कोच तैयार किए हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच इस क्षेत्र में सहयोग पुराना है। 2015-16 के दौरान भी RCF ने बांग्लादेश रेलवे के लिए 120 LHB ब्रॉडगेज यात्री कोच तैयार किए थे। इसके बाद 2024 में बांग्लादेश रेलवे ने RITES के माध्यम से RCF को 200 ब्रॉडगेज यात्री कोचों का नया ऑर्डर दिया।

नए ऑर्डर के तहत अलग-अलग जरूरतों के अनुसार 7 तरह के कोच तैयार किए जाने हैं। पहला रेक इसी बड़े ऑर्डर का हिस्सा है। इससे भारतीय रेल कोच निर्माण की क्षमता और विदेशी रेलवे जरूरतों के अनुसार डिजाइन तैयार करने की क्षमता भी सामने आती है।

इस परियोजना को भारत के रेलवे निर्यात के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय रेल की उत्पादन इकाइयां अब केवल घरेलू जरूरतों के लिए कोच बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरे देशों की तकनीकी और परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार भी कोच तैयार कर रही हैं। बांग्लादेश के लिए बनाए गए ये कोच इसी क्षमता का उदाहरण हैं।

कपूरथला में तैयार इन कोचों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इनका डिजाइन बांग्लादेश की जरूरत के अनुसार बदला गया है। यानी भारत ने केवल मौजूदा कोच मॉडल को निर्यात नहीं किया, बल्कि ग्राहक देश की बिजली व्यवस्था, यात्री जरूरतों और परिचालन परिस्थितियों के हिसाब से इसमें तकनीकी बदलाव किए हैं। इससे भारतीय रेल विनिर्माण क्षेत्र की इंजीनियरिंग क्षमता भी उजागर होती है।

इस पूरी परियोजना से भारत और बांग्लादेश के बीच रेलवे सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर भी मिलेगा। पहले से मौजूद आपसी सहयोग और नए 200 कोचों के ऑर्डर को देखते हुए दोनों देशों के बीच रेल क्षेत्र में भविष्य में भी तकनीकी और व्यावसायिक साझेदारी की संभावनाएं बनी हुई हैं। कपूरथला से बांग्लादेश के लिए तैयार किया गया यह पहला नया रेक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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