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भावनाकाटी दूषित पानी कांड के बाद प्रशासनिक बदलाव

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भोपाल/इंदौर: मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोहित सिसोनिया को इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त पद से हटाकर भोपाल भेज दिया है और उन्हें मध्य प्रदेश शासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में उप सचिव के रूप में तैनात किया गया है। साथ ही राज्य के तीन अन्य IAS अधिकारियों को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार दिए गए हैं, ताकि निगम के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा सके।

यह प्रशासनिक बदलाव इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी कांड के बाद लिया गया कदम माना जा रहा है। इस मामले में पेयजल में प्रदूषित पानी के कारण कई लोगों की मौत और स्वास्थ्य समस्याएँ सामने आई थीं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी चिंता और नाराज़गी बनी थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रशासनिक समीक्षा के बाद यह बड़ा reshuffle किया गया है।

सरकारी आदेश के अनुसार, 2017 बैच के आईएएस रोहित सिसोनिया को नगर निगम से हटाकर कृषि विभाग में तैनात किया गया है, जबकि 2019 बैच के आईएएस आकाश सिंह, 2020 बैच के प्रखर सिंह, और 2020 बैच के आशीष कुमार पाठक को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गयी है। इन अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार सौंपने का उद्देश्य निगम के निगरानी, प्रशासन और सुरक्षा ढांचे को कड़ा बनाना बताया जा रहा है।

प्रशासनिक पदस्थापना से जुड़ी रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि इंदौर में पानी सप्लाई सेक्शन के प्रभारी सहायक यंत्री सहित कुछ अन्य तकनीकी अधिकारियों के खिलाफ भी जांच और कार्रवाई की जा रही है। इस कड़े प्रशासनिक कदम को सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार के इरादे से जोड़ा जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

उल्लेखनीय है कि विभागीय अधिकारियों के तबादलों को मध्य प्रदेश की सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के तहत अंजाम दिया गया है, जिसमें नगर निगम के अतिरिक्त प्रभार और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से विभाजित किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार अपने प्रशासनिक तंत्र को और अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और नागरिकों के हित में बनाने के प्रयास में जुटी है।

स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रशासनिक फेरबदल समय की मांग था, क्योंकि लोगों की जान और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करना अहम है। अब यह देखना बाकी है कि नए तैनात अधिकारियों के नेतृत्व में नगर निगम किस तरह नगरपालिका सेवाओं और संकट प्रबंधन में सुधार लाता है।

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