मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने एक बार फिर भारत और प्रधानमंत्री Narendra Modi की जमकर तारीफ की है। नेतन्याहू ने कहा कि “भारत में इजरायल के लिए अपार प्यार और सम्मान है” और दोनों देशों के रिश्ते अब केवल कूटनीतिक संबंध नहीं बल्कि एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत-इजरायल संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
नेतन्याहू ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू और सार्वजनिक संबोधन में कहा कि दुनिया के कई देशों में इजरायल को लेकर विरोध देखने को मिलता है, लेकिन भारत ऐसा देश है जहां लोगों के बीच इजरायल के प्रति सकारात्मक भावना लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “करीबी मित्र” बताते हुए कहा कि भारत और इजरायल के बीच विश्वास का रिश्ता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है।
इजरायली प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी की फरवरी 2026 की इजरायल यात्रा को भी याद किया। उस दौरान दोनों नेताओं की गर्मजोशी, गले मिलने की तस्वीरें और साझा कार्यक्रम पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बने थे। नेतन्याहू ने उस यात्रा को “लव फेस्ट” यानी दोस्ती और भरोसे का उत्सव बताया। उन्होंने कहा कि मोदी केवल इजरायल के दोस्त नहीं बल्कि “भाई” जैसे हैं।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भारत और इजरायल के रिश्तों में तेजी से विस्तार हुआ है। रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृषि, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देश लगातार साथ काम कर रहे हैं। भारत इजरायल से आधुनिक रक्षा उपकरण खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। वहीं इजरायल भारतीय बाजार और रणनीतिक साझेदारी को बेहद महत्वपूर्ण मानता है।
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी उन शुरुआती विश्व नेताओं में शामिल थे जिन्होंने इजरायल के समर्थन में आवाज उठाई थी। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाया और यह इजरायल कभी नहीं भूलेगा।
हालांकि भारत ने हाल के महीनों में संतुलित कूटनीतिक नीति अपनाने की कोशिश भी की है। एक ओर भारत इजरायल के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह फिलिस्तीन के समर्थन और मध्य पूर्व में शांति की बात भी करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में नेतन्याहू से फोन पर बातचीत में क्षेत्रीय तनाव पर चिंता जताई थी और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी और नेतन्याहू के बीच व्यक्तिगत केमिस्ट्री ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी है। 2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा से शुरू हुआ यह दौर अब रणनीतिक गठबंधन में बदल चुका है। फरवरी 2026 की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग से जुड़े कई अहम समझौतों पर चर्चा की थी।
इजरायल की संसद Knesset में पीएम मोदी को विशेष सम्मान भी दिया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी पहले विदेशी नेता बने जिन्हें “मेडल ऑफ द Knesset” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए दिया गया था।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच नेतन्याहू का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दुनिया के कई देशों में इजरायल की नीतियों को लेकर विरोध बढ़ा है। ऐसे समय में भारत का नाम लेकर नेतन्याहू ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि इजरायल पूरी तरह अलग-थलग नहीं पड़ा है और उसके पास मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदार मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत और इजरायल के संबंध और गहरे हो सकते हैं। रक्षा तकनीक, ड्रोन, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हालांकि भारत को एक संतुलित विदेश नीति भी बनाए रखनी होगी क्योंकि उसके अरब देशों और ईरान के साथ भी महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं।
