मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। कोर्ट ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को बेहद अहम आधार बनाया। करीब 242 पन्नों के फैसले में अदालत ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्य, शिलालेख, मूर्तियां और स्थापत्य शैली यह साबित करते हैं कि विवादित ढांचा मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था। इसके साथ ही अदालत ने 2003 में जारी उस व्यवस्था को भी रद्द कर दिया जिसमें मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले के पीछे ASI की विस्तृत रिपोर्ट को निर्णायक माना जा रहा है। ASI ने करीब 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था और जुलाई 2024 में 2000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कई ऐसे पुरातात्विक प्रमाण मिले जिन्हें अदालत ने महत्वपूर्ण माना। सर्वे के दौरान परिसर में देवी-देवताओं की टूटी मूर्तियां, कमल आकृतियां, मंदिर शैली के स्तंभ, संस्कृत शिलालेख और धार्मिक प्रतीक मिले थे। कई पत्थरों पर संस्कृत में मंत्र और श्लोक भी खुदे हुए पाए गए।
ASI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान ढांचे में इस्तेमाल किए गए कई पत्थर और स्तंभ पहले से मौजूद किसी विशाल मंदिर संरचना के हिस्से थे। सर्वे में मिले स्थापत्य अवशेषों की शैली परमार काल से जुड़ी बताई गई, जिसे राजा भोज के शासनकाल का दौर माना जाता है। हिंदू पक्ष लगातार दावा करता रहा है कि भोजशाला प्राचीन काल में संस्कृत शिक्षा और मां वाग्देवी की उपासना का प्रमुख केंद्र था। अदालत ने भी अपने फैसले में ऐतिहासिक रिकॉर्ड और साहित्यिक साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए माना कि यह स्थान राजा भोज के समय से जुड़ा हुआ है।
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट पर सवाल भी उठाए। वरिष्ठ वकीलों ने अदालत में दलील दी कि सर्वे रिपोर्ट “पक्षपातपूर्ण” और “त्रुटिपूर्ण” है तथा केवल ASI के निष्कर्षों के आधार पर किसी स्थल का धार्मिक स्वरूप तय नहीं किया जा सकता। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि मामला दीवानी अदालत में जाना चाहिए था, न कि सीधे हाईकोर्ट में तय किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि वैज्ञानिक सर्वेक्षण तथा ऐतिहासिक साक्ष्य पर्याप्त रूप से मंदिर संरचना की पुष्टि करते हैं।
फैसले के बाद धार समेत पूरे मध्य प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया था ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। फैसले के बाद हिंदू संगठनों ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा कर दी है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य संगठनों का कहना है कि वे हाईकोर्ट के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती देंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भोजशाला फैसला भविष्य में देश के अन्य मंदिर-मस्जिद विवादों पर भी असर डाल सकता है। ज्ञानवापी और मथुरा जैसे मामलों में भी ASI सर्वे और ऐतिहासिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। हालांकि अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि हर मामला अपने अलग तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।
भोजशाला विवाद कई दशकों से देश की राजनीति, इतिहास और धार्मिक विमर्श का हिस्सा रहा है। लेकिन इस बार ASI की वैज्ञानिक रिपोर्ट ने पूरे केस की दिशा बदल दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवादित परिसर में हिंदू पूजा परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी और ऐतिहासिक दस्तावेज भी इसी ओर संकेत करते हैं। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है, जहां यह मामला आगे और बड़ा कानूनी व संवैधानिक मुद्दा बन सकता है।
