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बिहार में उग्र हुआ छात्र आंदोलन, NEET पेपर लीक और जंतर-मंतर लाठीचार्ज के विरोध में कई जिलों में प्रदर्शन

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और NEET पेपर लीक विवाद के विरोध की गूंज अब बिहार के कई जिलों तक पहुंच गई है। राज्य के कटिहार, बेगूसराय, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर समेत कई इलाकों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं पर कठोर कार्रवाई तथा प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि देशभर के करोड़ों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा प्रश्न है।

बिहार में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर छात्रों ने जुलूस निकाले, नारेबाजी की और सरकार से परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की। प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका आरोप है कि वर्षों की मेहनत के बावजूद यदि प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो जाएं तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होता है। छात्रों ने दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी दोहराई।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प ने भी आंदोलन को और तेज कर दिया है। बिहार के प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखने वाले छात्रों के साथ बल प्रयोग नहीं होना चाहिए था। कई छात्र संगठनों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और उनकी आवाज सुनने के बजाय बल प्रयोग करना उचित नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।

बिहार में विरोध प्रदर्शनों के दौरान विभिन्न छात्र संगठनों ने सरकार से मांग की कि भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और तकनीकी रूप से सुरक्षित व्यवस्था लागू की जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो लाखों युवाओं का परीक्षा प्रणाली से विश्वास उठ सकता है। कई छात्रों ने यह भी कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

इस पूरे घटनाक्रम का असर संसद तक भी पहुंच चुका है। विपक्षी दल लगातार सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांग रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि पेपर लीक के मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था की जाएगी तथा परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि छात्र संगठनों का कहना है कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं और उन्हें ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों की संख्या बहुत अधिक है, इसलिए पेपर लीक जैसे मामलों का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी व्यापक होता है। लंबे समय तक परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित रहने से छात्रों का समय, संसाधन और मानसिक संतुलन प्रभावित होता है। यही कारण है कि इस बार आंदोलन केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के बीच एकजुटता देखने को मिल रही है।

फिलहाल बिहार में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। ऐसे में सरकार, छात्र संगठनों और संबंधित एजेंसियों के बीच संवाद स्थापित करना आवश्यक माना जा रहा है, ताकि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल हो और छात्रों की चिंताओं का समाधान निकाला जा सके।

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