देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की छह सीटों पर मंगलवार 6 अक्टूबर को उपचुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है। इनमें असम की नगांव लोकसभा सीट के अलावा पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर, तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम तथा पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट शामिल हैं। सभी सीटों पर सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ है और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। चुनाव परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
असम की नगांव लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला खास तौर पर दिलचस्प माना जा रहा है। यह सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बोरदोलोई ने 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का रुख किया और अब विधायक हैं। उपचुनाव में बीजेपी ने पूर्व आईएएस अधिकारी देवाशीष शर्मा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा पर भरोसा जताया है। AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल के मैदान में होने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
नगांव सीट के चुनावी समीकरण में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी भी अहम मानी जा रही है। परिसीमन के बाद इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख मतदाता हैं और इनमें 55 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता बताए जाते हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यह सीट जीती थी, लेकिन अब राजनीतिक समीकरण बदल चुके हैं। ऐसे में बीजेपी, कांग्रेस और AIUDF तीनों के लिए यह चुनाव अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका है।
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट पर भी सबकी नजर है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी, जिसके कारण यहां उपचुनाव हो रहा है। बीजेपी ने हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस के मिलन प्रधान मैदान में हैं। नंदीग्राम की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए यह मुकाबला राज्य की सियासत में खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी कई दलों के बीच मुकाबला है। यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनाव में दो सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में रेजीनगर सीट छोड़ दी। उपचुनाव में उनके बेटे गुलाम नबी आजाद मैदान में हैं। बीजेपी ने शंकराव सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि अन्य दलों ने भी अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इस वजह से यहां भी मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है।
तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। दोनों सीटों पर 2026 के विधानसभा चुनाव में AIADMK के उम्मीदवार जीते थे, लेकिन बाद में दोनों विधायकों ने इस्तीफा देकर अभिनेता विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम यानी TVK का दामन थाम लिया। अब दोनों सीटों पर उपचुनाव हो रहा है और TVK पहली बार किसी उपचुनाव में अपनी ताकत आजमा रही है। यहां TVK, DMK और AIADMK के बीच मुकाबला प्रमुख रूप से देखा जा रहा है।
मदुरंतकम में 2 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि धारापुरम में भी दो लाख से अधिक मतदाता हैं। इन दोनों सीटों का परिणाम TVK के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी की वास्तविक जमीनी पकड़ का यह शुरुआती चुनावी परीक्षण माना जा रहा है। वहीं DMK और AIADMK भी इन सीटों पर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं।
पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में दो सीटों से जीत दर्ज की थी और बाद में थट्टनचावडी सीट से इस्तीफा दे दिया। इसी वजह से यहां उपचुनाव की नौबत आई। इस सीट पर सत्तारूढ़ AINRC के नेतृत्व वाले NDA और विपक्षी दलों के बीच मुकाबले को पुडुचेरी की नई सरकार के लिए एक अहम राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक छह सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। इन उपचुनावों में सभी मतदान केंद्रों पर EVM और VVPAT का इस्तेमाल किया जा रहा है। मतदाताओं की पहचान के लिए EPIC मुख्य दस्तावेज है, जबकि आयोग ने निर्धारित वैकल्पिक पहचान पत्रों को भी मान्य किया है। चुनाव प्रक्रिया 11 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।
इन छह उपचुनावों से केंद्र या संबंधित राज्य सरकारों के बहुमत पर तत्काल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इनके नतीजे अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों की मौजूदा ताकत का संकेत जरूर दे सकते हैं। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर, असम में नगांव और तमिलनाडु में मदुरंतकम-धारापुरम पर खास नजर है। अब मतदान के बाद 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजे बताएंगे कि इन सीटों पर किस दल को जनता का समर्थन मिला और किन पार्टियों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।
