
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़
बीजापुर (छत्तीसगढ़) – प्रदेश के बस्तर क्षेत्र के दक्षिणी बीजापुर में शनिवार को सुरक्षा बलों और माओवादी उग्रवादियों के बीच एक भारी मुठभेड़ हुई, जिसमें अब तक कई माओवादी लड़ाके मारे गए हैं और तलाशी-अभियान जारी है। यह मुठभेड़ स्थानीय समयानुसार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान शुरू हुई, जब सुरक्षा टीम ने माओवादी गतिविधियों की सूचना पर गहन जंगल इलाके में छापा मारा।
फायरिंग और परिणाम
स्थानीय पुलिस और बलों के अनुसार, सुरक्षा बल सर्च ऑपरेशन चला रहे थे, तभी घात लगाए बैठे माओवादी उग्रवादियों से उनकी टक्कर हो गई और दोनों पक्षों के बीच फायरिंग शुरू हो गई। शुरुआती मुठभेड़ में कम से कम दो माओवादी लड़ाके ढेर हुए पाए गए हैं और तलाशी अभियान अभी भी जारी है।
बीजापुर में यह कार्रवाई माओवादी गतिविधियों पर काबू पाने, जंगलों में पूँजी जमा रखने और हिंसक उग्रवाद को रोकने की सरकार-पुलिस की लगातार कोशिशों का हिस्सा है। सैन्य और पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इलाके में सक्रिय माओवादी संगठनों की मौजूदगी के बारे में सटीक इंटेलिजेंस के आधार पर यह अभियान शुरू किया गया था।
पूरे बस्तर क्षेत्र का परिप्रेक्ष्य
बीजापुर के अलावा, उसी दिन सुकमा जिले में भी सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच एक अलग मुठभेड़ हुई, जिसमें कुल मिलाकर लगभग 14 माओवादी लड़ाके मारे गए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों ही मुठभेड़ों में माओवादी उग्रवादियों के खिलाफ रणनीतिक ढंग से ऑपरेशन चलाया गया, जो कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों को समाप्त करने की सरकार की योजना का हिस्सा है।
बीजापुर लंबे समय से माओवादी प्रभावित इलाकों में एक प्रमुख गढ़ रहा है, खासकर इंद्रावती नेशनल पार्क और आसपास के घने जंगलों के कारण। सुरक्षा बलों ने पिछले वर्षों में यहां कई अभियानों में भारी सफलता हासिल की है, जिसमें नक्सलियों के हथियार, विस्फोटक सामग्री और अन्य सामग्रियाँ जब्त की गई हैं।
सुरक्षा बलों की तैयारियाँ और चुनौतियाँ
बीजापुर में चल रहे अभियान के तहत District Reserve Guard (DRG), CRPF, Special Task Force (STF) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें हिस्सा ले रही हैं। भारी वन क्षेत्र और कठिन भू-भाग में चलने वाली इस लड़ाई में सुरक्षा बलों को खतरनाक IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) और घात लगाकर हमला करने की रणनीति का सामना करना पड़ता रहा है। हाल ही में भी सुरक्षा बलों ने तलाशी के दौरान लगभग 10 किलो IED तथा अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त की थी, जिससे एक संभावित बड़े हादसे को समय रहते रोका गया।
क्षेत्र में शांति बहाल करने की कोशिशें
छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार यह दावा करती रही हैं कि नक्सल-विरोधी अभियान बस्तर क्षेत्र को 2026 तक नक्सल-रहित बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए केवल मुठभेड़ ही नहीं, बल्कि ग्राम सुरक्षा तंत्र मजबूत करना, कमान गिराना और नक्सलियों को आत्मसमर्पण की राह पर लाना जैसी नीतियाँ भी अपनाई जा रही हैं। पिछले वर्षों में नक्सलियों के आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे संगठन की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है।



