दिल्ली में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है। सोमवार, 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं को तत्काल रिहाई देने से इनकार करते हुए उन्हें 21 अक्टूबर तक हिरासत में रखने का आदेश दिया। यह मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से जुड़ा है। हिरासत बढ़ाए जाने के बाद पार्टी ने न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
अदालत में सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं के आचरण पर टिप्पणी की। आदेश के अनुसार, उन्होंने 11 अक्टूबर को दिए गए आश्वासनों और शांति बनाए रखने की शर्तों का कथित उल्लंघन किया। मजिस्ट्रेट ने कहा कि उनके पिछले आचरण को देखते हुए भविष्य में दोबारा ऐसा होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोनों की ओर से दिए गए इस भरोसे को भी पर्याप्त नहीं माना कि वे आगे ऐसी घटना नहीं दोहराएंगे।
दिल्ली पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए दलील दी कि दोनों नेताओं की रिहाई से सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पुलिस के अनुसार, दोनों ने जंतर-मंतर पर प्रवेश संबंधी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया था और वहां प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने में भूमिका निभाई थी। पुलिस ने यह भी आशंका जताई कि रिहाई के बाद वे फिर से प्रदर्शन आयोजित कर सकते हैं। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इन आशंकाओं को आधारहीन बताते हुए कहा कि रिहाई रोकने के लिए पर्याप्त ठोस कारण पेश नहीं किए गए।
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने हिरासत बढ़ाए जाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानत की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है और दोनों नेताओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है। रत्ना सिंह के मुताबिक, उनके पक्ष की ओर से जमानतदारों और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी, इसके बावजूद राहत नहीं मिली। उन्होंने संकेत दिया कि इस आदेश को उच्च अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
इस मामले की शुरुआत जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से हुई थी। CJP नेताओं और उनके समर्थकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की थी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठाए थे। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान दोनों नेताओं ने बंद गेट पार करके परिसर में प्रवेश किया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
CJP का कहना है कि उसका विरोध मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर है। पार्टी ने जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के फैसले पर भी आपत्ति जताई है। वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान तय नियमों और सार्वजनिक व्यवस्था का पालन जरूरी है। इस विवाद में एक ओर विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सवाल है, तो दूसरी ओर प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रतिबंधों के पालन का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है।
इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से जुड़े कथित अतिक्रमण मामले को अपनी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। यह कदम हिरासत बढ़ाए जाने के बाद उठाया गया। सौरव दास और आशुतोष रांका को अब 21 अक्टूबर को फिर से पेश किया जाना है। आगे की सुनवाई में जमानत, जमानतदारों की स्वीकार्यता और पुलिस की आशंकाओं पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर मामले की अगली दिशा निर्भर करेगी।
