दिल्ली-NCR में रहने वाले लाखों लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। राजधानी और आसपास के इलाकों में CNG की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है, जिसके बाद ऑटो, टैक्सी, कैब और निजी वाहनों से सफर करना महंगा पड़ सकता है। गैस वितरण कंपनी Indraprastha Gas Limited यानी IGL ने नई दरें लागू कर दी हैं। इस बढ़ोतरी का असर सीधे उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना CNG वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
नई दरों के मुताबिक दिल्ली में CNG की कीमत लगभग 77 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है, जबकि नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में इसकी कीमत और अधिक हो गई है। IGL की वेबसाइट के अनुसार नोएडा और गाजियाबाद में CNG करीब 85 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिक रही है। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और प्राकृतिक गैस की बढ़ती लागत के कारण गैस कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान-इजरायल और अमेरिका से जुड़े हालात का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने से ऊर्जा कंपनियों की लागत बढ़ रही है। इसी दबाव के चलते देश के कई हिस्सों में CNG की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में मुंबई और पुणे जैसे शहरों में भी CNG के दाम बढ़ाए गए थे।
CNG महंगी होने का सबसे बड़ा असर सार्वजनिक परिवहन और छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है। दिल्ली-NCR में हजारों ऑटो और टैक्सी चालक CNG पर निर्भर हैं। कीमत बढ़ने के बाद कई ऑटो यूनियनों ने किराया बढ़ाने की मांग शुरू कर दी है। यदि ऐसा होता है तो रोज ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और आम यात्रियों का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा स्कूल वैन, डिलीवरी सेवाएं और छोटे मालवाहक वाहन भी महंगे संचालन खर्च का सामना करेंगे।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और PNG की दरों में भी और बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार में दिखना लगभग तय माना जा रहा है। खास बात यह है कि CNG को अब तक पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें इस धारणा को कमजोर कर सकती हैं।
इस बीच IGL ने कहा है कि बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद CNG अभी भी पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अपेाकृत सस्ता विकल्प बनी हुई है। कंपनी का दावा है कि गैस सप्लाई और संचालन लागत में बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना जरूरी हो गया था। हालांकि आम उपभोक्ताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में हर बढ़ोतरी सीधे घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है।
