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जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी, अभिजीत दिपके धरने पर डटे, पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन ने पकड़ा नया मोड़

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देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया गया, जबकि पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है तथा बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे रहे और उन्होंने कहा कि आंदोलन को फिलहाल जारी रखा जाएगा, लेकिन आगे किसी बड़े मार्च की रणनीति पर पुनर्विचार किया जाएगा ताकि प्रदर्शनकारियों को किसी तरह की शारीरिक क्षति न पहुंचे। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से पहुंचाना है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल के आसपास निगरानी बढ़ा दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया है।

इस आंदोलन को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला हुआ है। वे पहले से ही भूख हड़ताल के माध्यम से प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता जता रहे हैं। उनके समर्थन से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक चर्चा मिली है और विभिन्न छात्र संगठनों तथा सामाजिक समूहों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रदर्शनकारी लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने जैसी मांगों को प्रमुखता से उठा रहे हैं।

सोमवार को संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हुए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने हिंसा और पथराव के आरोपों में मामला दर्ज किया है। वहीं, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया और कई लोगों को बिना वजह हिरासत में लिया गया। इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं, जिससे पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई।

सरकार की ओर से प्रदर्शन को लेकर अलग रुख सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान किया जाता है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने या सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाते हुए पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस बीच दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर भी चर्चा चल रही है, हालांकि अभी तक किसी ठोस समाधान की घोषणा नहीं हुई है।

हालिया घटनाओं के बाद CJP ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन समाप्त नहीं होगा, बल्कि आगे की रणनीति शांतिपूर्ण धरनों, जनसभाओं और संवाद के माध्यम से तय की जाएगी। संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य हिंसा नहीं बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और सरकार व प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का क्या परिणाम निकलता है, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

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