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“बिहार में 20–25 हजार में लड़कियाँ मिलती हैं” — आपत्तिजनक बयान पर सियासी बवाल, महिलाओं के सम्मान पर उठे सवाल

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पटना/देहरादून: उत्तर भारत की राजनीति में एक आपत्तिजनक बयान ने भूचाल ला दिया है, जिसमें बिहार की महिलाओं को वस्तु की तरह बताने वाली टिप्पणी सामने आई है। यह विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू ने एक सभा के दौरान कहा कि “बिहार में 20–25 हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं।” उनके इस कथन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक दलों, महिला संगठनों और नागरिकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

वीडियो के अनुसार गिरधारी साहू ने युवा लोगों से सवाल करते हुए कहा कि अगर किसी को शादी के लिए लड़की नहीं मिली तो वह “बिहार से 20–25 हजार में लड़कियां ले आएंगा।” यह बयान सुनकर भीड़ में कुछ लोग हँसी भी कर रहे थे, लेकिन बाद में यह टिप्पणी बिहार और देशभर में महिलाओं के प्रति असंवेदनशील और degrading मानी गई।

महिला सम्मान पर बड़ा सवाल

बयान के वायरल होने के अगले ही दिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं का अपमान बताया। RJD ने कहा कि गिरधारी साहू का बयान बिहार की महिलाओं सहित सभी भारतीय महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है और ऐसे विचार को तत्काल माफ़ी मांगनी चाहिए। कुछ नेताओं ने तो इसे ‘महिला विरोधी मानसिकता’ का संकेत भी बताया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और महिला आयोग का अल्टीमेटम

बिहार में भाजपा के कुछ नेताओं ने बयान को शर्मनाक और अस्वीकार्य बताया और गिरधारी साहू के खिलाफ पार्टी स्तर पर कार्रवाई की मांग उठाई है। वहीं बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा सिंह ने गिरधारी साहू को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे सार्वजनिक रूप से महिलाओं के सम्मान के लिए स्पष्ट माफी माँगे। आयोग ने कहा कि ऐसा बयान समाज में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाता है और इससे महिलाओं में भय व अपमान की भावना फैल सकती है।

सामाजिक संगठनों और नागरिकों की प्रतिक्रिया

सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार संगठनों ने भी बयान की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि किसी राज्य की महिलाओं को बाजारू वस्तु की तरह पेश करना गम्भीर सोच की कमी और लैंगिक असमानता की वास्तविकता को दर्शाता है। ऐसे बयान समाज में महिला सुरक्षा और सम्मान की दिशा में किये जा रहे प्रयासों के खिलाफ हैं और यह महिलाओं के मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

मानव तस्करी और असंवैधानिक व्यापार के खतरों से जोड़कर देखने की अपील

विशेषज्ञों ने कहा है कि भले ही यह बयान व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया हो, ऐसे शब्द मानव तस्करी, देह व्यापार और लड़कियों के शोषण जैसी गंभीर समस्याओं के संदर्भ में सामाजिक चेतना को और अधिक महत्व देते हैं। पिछले कुछ समय में बिहार सहित देश के कुछ हिस्सों में मानव तस्करी और बच्चों तथा युवतियों के गायब होने के मामले मीडिया और पुलिस की रिपोर्टों में देखे गए हैं, जिससे यह मुद्दा और गंभीर हो जाता है।

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