राष्ट्रमंडल खेल (CWG) 2026 में भारतीय पैरा एथलेटिक्स ने इतिहास रच दिया है। महिला शॉटपुट F57 स्पर्धा में भारत की शर्मिला धनकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि उनकी हमवतन शिल्पा शायला ने कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और उपलब्धि जोड़ दी। खास बात यह रही कि राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पहली बार भारत ने पैरा एथलेटिक्स की किसी स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया है। शर्मिला की इस जीत को भारतीय पैरा खेलों के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है, जिसने देशभर के खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में उत्साह भर दिया है।
महिला शॉटपुट F57 फाइनल में शर्मिला धनकर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा की और अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के दम पर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। उन्होंने पूरे मुकाबले के दौरान निरंतरता बनाए रखी और अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। दूसरी ओर, शिल्पा शायला ने भी शानदार संघर्ष किया। प्रारंभिक परिणामों में वह पदक से बाहर दिखाई दे रही थीं, लेकिन तकनीकी समीक्षा और एक अन्य खिलाड़ी के अयोग्य घोषित होने के बाद उन्हें कांस्य पदक प्रदान किया गया। इस तरह भारत ने एक ही स्पर्धा में दो पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।
शर्मिला धनकर की सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लंबे संघर्ष और मेहनत का परिणाम भी मानी जा रही है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी इस ऐतिहासिक जीत ने यह साबित कर दिया कि भारतीय पैरा खिलाड़ी विश्व स्तर पर किसी से कम नहीं हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भविष्य में पैरा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और देश में पैरा खेलों को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।
शिल्पा शायला का कांस्य पदक भी कम महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और अंत तक मुकाबले में बनी रहीं। अंतिम परिणामों में बदलाव के बाद उनके खाते में कांस्य पदक आया, जिससे भारतीय दल की खुशी दोगुनी हो गई। एक ही प्रतियोगिता में दो भारतीय खिलाड़ियों का पदक जीतना भारतीय पैरा एथलेटिक्स की बढ़ती ताकत का संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता दिखाई दे रहा है। शर्मिला धनकर के स्वर्ण और शिल्पा शायला के कांस्य सहित भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में लगातार पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। इन सफलताओं की बदौलत भारत की पदक तालिका में भी स्थिति मजबूत हुई है और भारतीय दल का मनोबल काफी ऊंचा हुआ है। आने वाले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से इसी तरह के दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
