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दीप्ति जीवांजी ने एशियन पैरा गेम्स में फिर लहराया तिरंगा, 400 मीटर रेस में गोल्ड के साथ बनाया नया रिकॉर्ड

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भारत की स्टार पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। जापान के नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में दीप्ति ने 56.36 सेकंड का समय निकालकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। उनकी इस उपलब्धि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पैरा एथलेटिक्स का मान बढ़ा है।

दीप्ति ने फाइनल में शुरुआत से ही दमदार प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। जापान की नीना कान्नो ने 58.92 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीता, जबकि जापान की ही अकाने कातो 1 मिनट 0.26 सेकंड में दौड़ पूरी कर कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं। दीप्ति ने दूसरे स्थान पर रहने वाली खिलाड़ी से दो सेकंड से भी अधिक का अंतर बनाए रखा।

इस जीत के साथ दीप्ति ने प्रतियोगिता में अपना दबदबा एक बार फिर साबित किया है। उन्होंने हीट राउंड में भी 57.57 सेकंड का समय निकालकर रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन फाइनल में अपने प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए 56.36 सेकंड में दौड़ पूरी की। उनका यह प्रदर्शन भारतीय दल के लिए भी खास रहा, क्योंकि इस स्वर्ण पदक के साथ भारत ने खेलों में अपना पांचवां गोल्ड हासिल किया।

तेलंगाना की रहने वाली 23 वर्षीय दीप्ति पहले भी कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। उन्होंने 2023 के एशियन पैरा गेम्स में भी महिलाओं की 400 मीटर टी20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 2024 में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया और अपनी पहचान दुनिया की प्रमुख पैरा एथलीटों में बनाई।

दीप्ति के करियर की एक बड़ी उपलब्धि पेरिस पैरालंपिक 2024 में आई, जहां उन्होंने इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इस सफलता के बाद वह भारत की उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गईं, जिन्होंने पैरा एथलेटिक्स के वैश्विक मंच पर देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। अब एशियन पैरा गेम्स में नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने शानदार सफर में एक और उपलब्धि जोड़ ली है।

टी20 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए होती है जिन्हें बौद्धिक अक्षमता से जुड़ी चुनौतियां होती हैं। इस वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों के लिए गति, एकाग्रता और दौड़ की रणनीति अहम भूमिका निभाती है। दीप्ति का लगातार बड़े मंचों पर पदक जीतना उनकी मेहनत, अनुशासन और निरंतर बेहतर होते प्रदर्शन को दर्शाता है।

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