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“सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पशु कल्याण बोर्ड का बड़ा एक्शन प्लान—10 लाख आवारा कुत्तों को माइक्रोचिपिंग”

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों को संभालने संबंधी आदेशों को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली एनीमल वेलफेयर बोर्ड (Animal Welfare Board) ने आज एक महत्वाकांक्षी एक्शन प्लान पेश किया है। इस योजना के तहत लगभग 10 लाख आवारा कुत्तों को माइक्रोचिप (Microchip) लगाया जाएगा, जिससे उनकी पहचान और लोकेशन ट्रैकिंग सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही, पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा और टीकाकरण कार्यक्रम का डिजिटलीकरण (digitization) करने की तैयारी की गई है।

इस कदम का उद्देश्य सिर्फ प्रशासनिक नियंत्रण बढ़ाना नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का पालन सुनिश्चित करना है कि कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाए जहां से उन्हें उठाया गया था—जिसमें कुछ कार्यों में एमसीडी की लापरवाही सामने आई थी।

इस योजना से एमसीडी (MCD) के कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि माइक्रोचिपिंग से यह ट्रैक किया जा सकेगा कि किस कुत्ते को किस स्थान पर छोड़ा गया। पशु प्रेमियों ने इस पहल का स्वागत किया है, जैसा कि रोहिणी से आए डॉग लवर्स ने भावुकता से कहा कि यह निर्णय “उनकी पहचान बचाएगा और ‘चोरी’ जैसी परिस्थितियों को रोकेगा”।


पृष्ठभूमि और सुप्रीम कोर्ट के आदेश:

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में एक बड़ा आदेश पारित किया था जिसमें आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में रखने की जगह उनकी नसबंदी, टीकाकरण और फिर मूल इलाके में छोड़ने का निर्देश दिया गया। केवल वे कुत्ते जो आक्रामक या रैबीज़ ग्रस्त हों, उन्हें शेल्टर में रखा जा सकता है।

साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगाई गई है और नगर निगमों को विशेष फीडिंग ज़ोन बनाने का निर्देश भी दिया गया है।

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