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दिल्ली के आश्रम में 1994 में दो साध्वियों की हत्या, 32 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार; फैक्ट्री में मजदूर बनकर रह रहा था

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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 1994 के दो साध्वियों की हत्या और डकैती के मामले में करीब 32 साल से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 48 वर्षीय ललित के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, वह पूर्वी दिल्ली के एक आध्यात्मिक आश्रम में हुई दोहरी हत्या के मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल था और वारदात के बाद से गिरफ्तारी से बचता रहा। उसे मंगोलपुरी फेज-2 स्थित एक फैक्ट्री से पकड़ा गया, जहां वह पैकेजिंग मजदूर के तौर पर काम कर रहा था।

पुलिस के अनुसार, मामला वर्ष 1994 का है और शकरपुर थाने में हत्या और डकैती से जुड़ी धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। आरोप है कि आश्रम में मौजूद दो साध्वियों की गला घोंटकर हत्या की गई थी। इसके बाद वहां से नकदी, जेवर और अन्य कीमती सामान लूट लिया गया था। जांच में ललित का नाम मुख्य आरोपियों में सामने आया और पुलिस का दावा है कि उसने पीड़ितों में से एक की हत्या में कथित तौर पर भूमिका निभाई थी।

इस मामले में पुलिस ने शुरुआती जांच के दौरान तीन अन्य आरोपियों सुनील कुमार, दिलीप राम और सुशील को गिरफ्तार किया था। हालांकि ललित पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। लंबे समय तक फरार रहने के बाद उसे 26 अक्टूबर 1995 को घोषित अपराधी घोषित किया गया था। इसके बाद से उसकी तलाश जारी थी और क्राइम ब्रांच ने पुराने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश जारी रखी।

पुलिस के मुताबिक, ललित मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है। वह करीब आठवीं कक्षा तक पढ़ा है और शुरुआती दौर में घरेलू कामगार के रूप में दिल्ली आया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात मामले में गिरफ्तार किए गए कुछ अन्य आरोपियों से हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, वारदात के बाद वह बिहार चला गया और वर्ष 2000 तक अलग-अलग जगहों पर काम करता रहा।

वर्ष 2000 के बाद ललित दोबारा दिल्ली आया और अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों में पैकेजिंग मजदूर के रूप में काम करने लगा। पुलिस का कहना है कि वह अपने अतीत की जानकारी छिपाकर अलग-अलग जगहों पर काम करता रहा, जिससे इतने लंबे समय तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हालांकि पुलिस के मुताबिक वह ललित नाम से ही रह रहा था, लेकिन उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में आसपास के लोगों को जानकारी नहीं थी।

क्राइम ब्रांच की सेंट्रल रेंज टीम को हाल में ललित के मंगोलपुरी फेज-2 इलाके में होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने उसकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई और उस फैक्ट्री तक पहुंची, जहां वह पैकेजिंग का काम कर रहा था। पुलिस ने उसकी पहचान की पुष्टि उसके आधार कार्ड के जरिए की और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी की जानकारी शकरपुर थाना पुलिस को भी दी गई।

पुलिस की जांच के मुताबिक, आरोपी ने लंबे समय तक अलग-अलग निर्माण इकाइयों में मजदूरी करते हुए अपनी पहचान और पुराने मामले से जुड़े विवरण छिपाए। पुलिस ने यह भी बताया कि ललित ने मई 2017 में शादी की थी और उसका परिवार है। उसके पांच साल का एक बेटा भी है। गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस 1994 की वारदात में उसकी कथित भूमिका और अन्य पहलुओं को लेकर आगे की जांच कर रही है।

करीब तीन दशक पुराने इस मामले में गिरफ्तारी को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की अहम कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि फरारी के दौरान ललित किन-किन जगहों पर रहा और क्या उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए किसी अन्य दस्तावेज या नाम का इस्तेमाल किया था। मामले में आगे की जांच जारी है।

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