दिल्ली के नॉर्थ-वेस्ट जिले के शालीमार बाग क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जहां रचना यादव नाम की 40 वर्षीय महिला की अज्ञात हमलावरों ने नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना उस समय हुई जब रचना किसी काम से बाहर निकली थीं। वारदात इतनी अचानक और तेज़ी से हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए, और हमलावर मौके से फरार हो गए।
कौन थीं रचना यादव? पति की हत्या के बाद इंसाफ की लड़ाई लड़ रहीं थीं
रचना यादव पहले से ही एक बेहद संवेदनशील मामले से जुड़ी थीं। कुछ साल पहले उनके पति संदीप यादव की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में—
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कई आरोपी नामजद थे,
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कुछ आरोपी गिरफ्तार हुए,
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लेकिन एक मुख्य आरोपी अब भी फरार था।
रचना लगातार इस केस को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। यहां तक कि वे सुप्रीम कोर्ट तक यह मामला लेकर गई थीं, ताकि उनके पति के हत्यारों को कठोर सज़ा मिल सके।
परिवार का कहना है कि इसी केस की वजह से उन्हें कई बार धमकियाँ भी मिली थीं, और रचना पिछले कुछ महीनों से काफी तनाव में थीं।
कैसे हुई हत्या? प्रत्यक्षदर्शियों का बयान
घटना के चश्मदीदों के मुताबिक—
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रचना को करीब से दो गोलियां मारी गईं,
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हमलावर बाइक या स्कूटर से आए थे,
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वारदात पूरी तरह से लक्षित (Targeted Killing) लग रही है,
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गोली मारने के बाद आरोपी कुछ ही सेकंड में फरार हो गए।
इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पुलिस खंगाल रही है, जिससे हमलावरों की पहचान की जा सके।
क्या है रंजिश का एंगल? पुलिस की जांच में ये बातें सामने
पुलिस के शुरुआती शक की दिशा साफ है। हत्या के पीछे बदले या गवाही दबाने का मकसद हो सकता है। कारण—
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रचना जिस केस को लड़ रही थीं, वह उनके पति की हत्या से जुड़ा था।
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परिवार का दावा है कि एक मुख्य आरोपी अभी भी जेल से बाहर है, और उसी पर शक गहरा है।
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रचना लगातार कोर्ट में पेशियाँ करती थीं, जिससे हत्यारों को डर था कि मामला उनके खिलाफ जा सकता है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि:
“यह मामला पुराने विवाद और पत्नी द्वारा इंसाफ की लड़ाई से जुड़ा प्रतीत होता है। सभी संभावित संदिग्धों की लिस्ट तैयार कर ली गई है।”
बेटी का दर्द—“पापा को मारने वाले आज भी खुले घूम रहे हैं… अब मां को भी खत्म कर दिया”
रचना की बेटी ने मीडिया से कहा:
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“मेरे पिता के छह में से एक आरोपी आज भी जेल में नहीं है।”
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“हमें उन्हीं पर शक है—वह हमारी फैमिली को खत्म करना चाहते हैं।”
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“मेरी मां बार-बार कहती थीं कि हमें न्याय मिलेगा, लेकिन उन्हें ही मार दिया गया।”
बेटी की यह टिप्पणी साफ इशारा करती है कि परिवार का शक किस ओर है।
पुलिस ने क्या कदम उठाए?
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पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।
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स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच इस केस में शामिल कर दी गई है।
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कई संदिग्धों पर निगरानी रखी जा रही है।
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रचना के मोबाइल और कॉल रिकॉर्ड्स भी खंगाले जा रहे हैं।
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पुलिस ने कहा है कि हत्यारों की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है।
बड़ा सवाल: क्या गवाही और न्याय की लड़ाई लड़ने वालों को सुरक्षा मिल रही है?
दिल्ली में इस तरह की लक्षित हत्या एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि—
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ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़ितों को पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं दी जाती?
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अगर रचना को सुरक्षा मिली होती, तो शायद यह वारदात रोकी जा सकती थी।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि जिन मामलों में पीड़ित परिवार उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट तक जाए, उन्हें सुरक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है।
