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डेनमार्क की पीएम का कड़ा रुख: “ग्रीनलैंड हमारी पहचान और संप्रभुता का सवाल है, कोई समझौता नहीं”

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ग्रीनलैंड को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जारी उभार के बीच डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता, सीमा और पहचान किसी भी बाहरी दबाव या हस्तक्षेप के लिए “बिकाऊ नहीं” है। उन्होंने कहा है कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक बंधन को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

ट्रंप प्रशासन द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए AI आधारित नक्शे, जिसमें ग्रीनलैंड को संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है, ने डेनमार्क और यूरोपीय देशों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने कहा कि डेनमार्क अपनी आज़ादी, पहचान और लोकतंत्र से समझौता नहीं करेगा और किसी भी ऐसे कदम का कड़ा प्रतिवाद किया जाएगा जो संप्रभुता को खतरे में डाले।

उन्होंने इस मुद्दे को केवल ग्रीनलैंड के सवाल के रूप में नहीं बल्कि वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुद्दे के रूप में देखा, जिसमें हर राष्ट्र की सीमा और पहचान का सम्मान होना ज़रूरी है। मेटे ने यूरोपीय नेताओं को भी एकजुट रहने का आह्वान किया है ताकि किसी भी अनाप-शनाप दबाव को रोका जा सके।

साथ ही, उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका या किसी अन्य देश ने टैरिफ-आधारित धमकियाँ या समझौता-बिजनासाजी की तो यूरोप प्रतिक्रियाशील और एकजुट रहेगा। डेनमार्क की स्पष्ट नीतियों में यह भी कहा गया है कि ग्रीनलैंड बेचने के लिए नहीं है और न ही उसकी संप्रभुता पर समझौता किया जा सकता है।

विश्लेषक मानते हैं कि यह बयान न केवल डेनमार्क की सख्ती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि यूरोपीय देशों के बीच समूहबद्ध प्रतिक्रिया और रणनीति ग्रीनलैंड के भविष्य के फैसलों में एक निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

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