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‘धुरंधर’ का क्रेज अगले स्तर पर—आदित्य धर लाएंगे BTS डॉक्यूमेंट्री को थिएटर में, भारतीय सिनेमा में नया प्रयोग

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बॉलीवुड में इन दिनों आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ फ्रेंचाइजी को लेकर जबरदस्त चर्चा है, और अब इसी सफलता को नए आयाम देने की तैयारी चल रही है। खबर है कि ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल की रिकॉर्डतोड़ कमाई के बाद निर्देशक इस पूरी फिल्म के मेकिंग यानी ‘बिहाइंड द सीन्स’ (BTS) फुटेज को एक फुल-लेंथ डॉक्यूमेंट्री के रूप में सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना बना रहे हैं। यह कदम भारतीय सिनेमा के लिए काफी अनोखा माना जा रहा है, क्योंकि अब तक इस तरह की मेकिंग फिल्में आमतौर पर ओटीटी या यूट्यूब तक सीमित रहती थीं।

सूत्रों के मुताबिक, इस डॉक्यूमेंट्री में फिल्म की शूटिंग के दौरान के अनदेखे दृश्य, एक्शन सीक्वेंस की तैयारी, कलाकारों की मेहनत और सेट पर बिताए गए खास पलों को दिखाया जाएगा। साथ ही इसमें स्टार कास्ट के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू भी शामिल होंगे, जिन्हें अभी तक जानबूझकर मीडिया से दूर रखा गया है ताकि उन्हें सीधे इस फिल्म के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।

बताया जा रहा है कि धुरंधर और धुरंधर: द रिवेंज ने बॉक्स ऑफिस पर मिलकर 3000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर इतिहास रच दिया है। इसी जबरदस्त सफलता को देखते हुए मेकर्स अब इसके ‘मेकिंग’ को भी एक सिनेमाई अनुभव में बदलना चाहते हैं। अगर यह योजना सफल होती है, तो यह भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड शुरू कर सकती है, जहां फिल्मों के निर्माण की प्रक्रिया भी कमर्शियल कंटेंट के रूप में पेश की जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह BTS डॉक्यूमेंट्री 2026 के आखिरी महीनों में सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है और बाद में इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी स्ट्रीम किया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह गोपनीय रखा जा रहा है, ताकि रिलीज से पहले कोई भी फुटेज लीक न हो और दर्शकों को थिएटर में एक नया और एक्सक्लूसिव अनुभव मिल सके।

फिल्म इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि ‘धुरंधर’ जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी का यह कदम न सिर्फ फैंस के लिए खास तोहफा होगा, बल्कि फिल्ममेकिंग की दुनिया को करीब से दिखाने का एक अनोखा मौका भी देगा। इससे दर्शकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि एक बड़े बजट की फिल्म के पीछे कितनी मेहनत, तकनीक और क्रिएटिविटी लगती है।

कुल मिलाकर, ‘धुरंधर’ का यह BTS डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के बदलते ट्रेंड और दर्शकों की बढ़ती जिज्ञासा का प्रतीक बन सकता है।

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