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दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी: डॉक्टर दंपति से 14.85 करोड़ की ठगी, पुलिस ने 1.9 करोड़ फ्रीज किए

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दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति से होने वाली साइबर ठगी का मामला अब बड़े पैमाने पर सामने आया है, जो डिजिटल अरेस्ट स्कैम के नाम पर अत्यंत परिष्कृत तरीके से अंजाम दिया गया। दिल्ली पुलिस ने इस ठगी के जाल में फँसे डॉ. ओम तनेजा (81) और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा (77) से करीब ₹14.85 करोड़ की राशि ठगने का खुलासा किया है, और प्राथमिक जांच में साइबर टीम ने इस घोटाले से जुड़े ₹1.9 करोड़ को फ्रीज कर लिया है।

पुलिस के अनुसार अपराधियों ने इस दंपति को “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर करीब 24 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 तक दो सप्ताह तक लगातार वीडियो कॉल और फोन पर निगरानी में रखा, जिससे उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि वे वास्तविक कानून प्रवर्तन एजेंसी और टेलीकॉम अधिकारियों की जाँच के अधीन हैं। उनसे काले कानून और गंभीर जांच का डर दिखा कर बार-बार पैसे ट्रांसफर करवाए गए और उन्होंने कुल आठ अलग-अलग ट्रांजैक्शनों में करोड़ों रुपये ठग दिए।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठगों ने इस धन की राशि को छिपाने के लिए अत्यधिक जटिल म्यूल अकाउंट्स (mule accounts) का नेटवर्क बनाया था। पुलिस को अब तक 700 से अधिक ऐसे बैंक खातों की पहचान हुई है जिनके माध्यम से यह रकम अलग-अलग राज्यों में ट्रांसफर की गयी — जिनमें गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तराखण्ड शामिल हैं। यह बहु-स्तरीय नेटवर्क चोरी की रकम को छिपाने और ट्रैकिंग को मुश्किल बनाने के लिए बनाया गया था।

थ्रिलर-जैसी इस वारदा की शुरुआत एक आम कॉल से हुई, जिसमें अपराधियों ने खुद को टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर और कानूनी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर दंपति को डराया। इसके बाद उन्हें लगातार फोन और वीडियो कॉल्स के जरिए बताया गया कि अगर वे सहयोग नहीं करेंगे तो उन पर कानूनी कार्रवाई कर दी जाएगी। इसी डर के चलते उन्होंने अपने कई बैंक खातों से लाखों और करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए।

डॉ. तनेजा दंपति अमेरिका में दशकों तक यूनाइटेड नेशन्स के साथ कार्य करते रहे और 2016 में रिटायरमेंट के बाद भारत लौटे थे। उन्होंने अपना जीवन-भर की जमा-पूंजी इसी साइबर ठगी में खो दी है। उनके अनुसार, धोखेबाज़ों ने शुरुआत में डर दिखाया, लेकिन बाद में दंपति के भरोसे को बनाने के लिए स्वयं को उनके “बच्चों” के समान प्रस्तुत किया था, जिससे उन्हें आगे की रकम देने में और भेदभाव महसूस न हो।

पुलिस फिलहाल साइबर यूनिट IFSO के नेतृत्व में इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और अन्य जुड़े खातों की पहचान तथा ठगों तक पहुँचने का प्रयास कर रही है। अभी तक इस गिरोह से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि गहराई से ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और बैंक KYC डेटा की मदद से जल्द ही इस साजिश के मुख्य ऑपरेटरों तक पहुंचने की उम्मीद है।

यह मामला दिल्ली सहित पूरे देश में बढ़ते साइबर अपराध की समस्या को उजागर करता है, जिसमें खासकर बुजुर्ग और अनुभवी लोग डिजिटल धोखे का शिकार बन रहे हैं। पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि अनजान कॉल्स, वीडियो कॉल धमकियाँ और नकली अधिकारियों के दबाव में कभी भी धन हस्तांतरित न करें तथा ऐसे मामलों में तुरंत साइबर सेल को सूचना दें।

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