कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक बेहद चर्चा में आया पोस्ट शेयर कर राजनीतिक हलकों में सियासी भूचाल ला दिया है। उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1990 के दशक की एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें युवा मोदी बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पास फर्श पर बैठे नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर को साझा करते हुए सिंह ने बीजेपी और उसकी विचारधारात्मक जड़, राष्ट्रवादी स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक क्षमता की तारीफ की, इसे “The power of organisation (यह संगठन की शक्ति है)” बताते हुए लिखा कि कैसे संघ और बीजेपी की संगठनात्मक मजबूती ने एक ज़मीनी कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री तक पहुँचाया। इस पोस्ट में उन्होंने अंत में “जय सिया राम” भी लिखा।
सिंह की इस टिप्पणियों ने न केवल बीजेपी और RSS के प्रति अप्रत्यक्ष प्रशंसा का संदेश दिया बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर एक संकेत के रूप में भी लिया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पोस्ट में कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक हैंडल और पार्टी अध्यक्ष मलिकارجुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा तथा जयराम रमेश को टैग किया था। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वह कांग्रेस नेतृत्व को संगठन सुधार और अनुशासन की आवश्यकता की ओर इशारा कर रहे थे।
यह पोस्ट उस समय आया जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक जारी थी। कई विश्लेषकों के अनुसार, दिग्विजय सिंह का यह कदम कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक मजबूती और केंद्रीय नेतृत्व के निर्णयों पर सवाल उठाने वाला इशारा माना जा रहा है। कुछ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह भी संभव है कि सिंह ने अपने पुराने अनुभवों और पार्टी की आंतरिक संरचना में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डालने की कोशिश की हो।
हालाँकि, इस बयान ने राजनीतिक प्रतिक्रिया को और तेज़ कर दिया है। बीजेपी ने कहा कि दिग्विजय सिंह के इस पोस्ट ने कांग्रेस नेतृत्व को “डेट्रैक्ट” किया है और पार्टी की अंदरूनी कार्यशैली तथा नेतृत्व को उजागर किया है। बीजेपी के प्रवक्ता सीआर केसवन ने पूछा कि क्या राहुल गांधी साहस दिखाकर इस ‘सत्य बम’ पर प्रतिक्रिया देंगे, जो कांग्रेस की कथित “स्वायत्त और लोकतांत्रिक नेतृत्व” की छवि को चुनौती देता है।
इस बीच, दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में स्पष्टीकरण भी दिया कि उनके शब्दों का अर्थ ग़लत समझा गया है। उन्होंने कहा कि वे RSS और प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों या विचारधारा के समर्थक नहीं हैं, बल्कि केवल उनकी संगठनात्मक क्षमता की सराहना कर रहे हैं। सिंह ने यह भी जोड़ा कि वे स्वयं RSS और मॉडी दोनों के कट्टर विरोधी रहे हैं और पार्टी के अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती को लेकर ही उन्होंने यह बात कही। उनकी दलील थी कि एक गैर-पंजीकृत संगठन (RSS) के पास इतनी शक्ति कैसे है कि वह आसानी से शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का मार्ग बना देता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, दिग्विजय सिंह की यह पोस्ट कांग्रेस के भीतरी मतभेदों और संगठनात्मक चुनौतियों पर भी प्रकाश डालती है, जहाँ कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी सुधार पर जोर दिया है। सिंह ने इससे पहले भी कांग्रेस में विकेंद्रीकरण (decentralization) और व्यावहारिक संगठनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर दस्तक दी थी, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी से पार्टी के ढांचे को मजबूत करने की अपील भी की थी।
यह विवाद अब राजनीति की बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है, जहाँ एक तरफ बीजेपी और RSS की आलोचना और तारीफ के बीच संतुलन तलाशने की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के भीतर संगठन, नेतृत्व और सुधारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह पोस्ट न केवल राजनीतिक मंच पर चर्चा का मुद्दा बना हुआ है, बल्कि सामाजिक मीडिया पर भी लोगों के अलग-अलग प्रतिक्रियाओं का विषय बना हुआ है, जिससे सियासत में एक नया चर्चा-फैलाव देखने को मिल रहा है।
