
बांग्लादेश के मयमनसिंह में 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी और शव को जला दिया, जिससे भारत में गहरा आक्रोश फैल गया है। इस घटना के विरोध में देशभर के 10 से अधिक शहरों में प्रदर्शन हुए हैं, जिनमें दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, भोपाल, ऋषिकेश और जम्मू शामिल हैं।
दिल्ली में बवाल और झड़पें:
नागरिकों और धार्मिक संगठनों जैसे विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जमकर विरोध किया, जहां प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस के साथ झड़पों की खबरें भी आईं। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं।
देशभर में प्रदर्शन:
– भोपाल में भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें पुतला दहन और न्याय की मांग की गई।
– रायपुर सहित अन्य शहरों में धार्मिक संगठनों ने भारी भीड़ के साथ प्रदर्शन किया।
– ऋषिकेश में हिंदू सुरक्षा संघ ने बांग्लादेश सरकार की नीतियों के खिलाफ जुलूस निकाला और पुतला जलाया।
जम्मू में खास अपील:
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री से अपील की कि या तो हिंदुओं को भारत सुरक्षित वापस लाया जाए या बांग्लादेश में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
राजनयिक तनाव भी बढ़ा:
बांग्लादेश ने भारत में हुई प्रदर्शनकारियों की हिंसा के बाद भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया है, और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दबाव बढ़ गया है। बांग्लादेश सरकार ने यह भी कहा कि ऐसी हिंसा से शांति और संवेदनशीलता को खतरा होता है।
परिवार की मांग:
दीपू दास के परिजन भी इंसाफ की मांग कर रहे हैं, और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की आवाज़ उठी है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों और हिंसा पर चिंता व्यक्त की है, जबकि अमेरिकी सांसदों ने भी इस घटना की निंदा की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बल दिया है।



