
दीपू चंद्र दास हत्या मामले का मुख्य आरोपी बांग्लादेश पुलिस ने किया गिरफ्तार
बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका उपज़िला में हुए भयानक दीपू चंद्र दास (Dipu Chandra Das) हत्या-और-लिंचिंग मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। देश की Detective Branch (DB) पुलिस ने अब तक फरार चल रहे इस कांड के मुख्य आरोपी यासीन अराफात (Yasin Arafat) को धाका के डेमरा थाना अंतर्गत सरूलिया इलाके से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि यासीन ही वह व्यक्ति था जिसने अन्य लोगों को इकट्ठा कर भीड़ को उकसाया और दास पर हमला करते हुए उसकी हत्या की साजिश रची थी।
यह मामला दिसंबर 2025 के 18 दिसंबर को भालुका स्थित Pioneer Knitwear BD Ltd फैक्ट्री के बाहर शुरू हुआ था, जब दास नाम के एक हिंदू गारमेंट工 श्रमिक (Garment Worker) पर ईशनिंदा (blasphemy) के आरोप के बाद भीड़ ने हमला किया था। आरोपी यासीन ने अन्य स्थानीय लोगों के साथ मिलकर दास को पहले गंभीर रूप से पीटा, उसके शरीर को रस्सी से बाँधकर एक पेड़ से लटका दिया और उसके बाद उसके शव को आग के हवाले कर दिया था, जिससे पूरे इलाके में भय और आक्रोश फैल गया था।
पकड़े गए यासीन की उम्र लगभग 25 वर्ष बताई जा रही है और पुलिस के अनुसार वह पहले मस्जिद में इमाम (imam) और मदरसा में शिक्षक भी रह चुका है। हत्या के तुरंत बाद वह फरार हो गया था और लगभग 12 दिनों तक पुलिस को चकमा देता रहा। फिर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर उसे पकड़ लिया। इस गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में अब तक कुल 21 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और कई अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए पूछताछ जारी है।
यह भयावह घटना न सिर्फ बांग्लादेश में, बल्कि भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी तीव्र प्रतिक्रिया का विषय बनी हुई है। इस हत्या की वजह से वहां की अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं, जिससे कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। इस बीच घटनास्थल के आसपास के क्षेत्र में तनाव और पुलिस सुरक्षा कड़ी कर दी गई है ताकि किसी और अप्रिय घटना को रोका जा सके।
पुलिस ने बताया है कि यासीन ने खुद भीड़ को उकसाते हुए नारे लगाए, जिससे लोग इकट्ठा हुए और उसने ही दास को ज़ोर-शोर से खींचकर निर्दयता से मौत के घाट उतारा। सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उम्मीद कर रही है कि बाकी आरोपियों तक पहुंच बन सकेगी और पूरे कांड की व्यापक जांच को पूरा किया जा सकेगा।
हालाँकि बांग्लादेश सरकार की तरफ से भी यह मामला स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों में कानून-व्यवस्था रोकने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन यह घटना धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सामाजिक सद्भावना पर बड़े सवाल भी खड़े कर रही है। परिवार के सदस्यों और स्थानीय समुदाय के लोग अब न्याय मिलने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि ऐसे हिंसक कृत्यों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह समुदायों के बीच बढ़ते तनाव, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के सवालों के रूप में भी उभर रहा है, जिसका असर न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है।



