मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर तेहरान ने तुरंत पीछे नहीं हटाया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में भारी तबाही देखी जा रही है। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो चुकी है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
दरअसल 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के सैन्य ठिकानों, सरकारी संस्थानों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े स्थानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक शुरू की थी। इन हमलों का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना बताया गया। कई रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में सैकड़ों ठिकानों को निशाना बनाया गया और हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि अब केवल एक ही रास्ता बचा है—“बिना शर्त आत्मसमर्पण”। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अपनी आक्रामक कार्रवाई नहीं रोकी तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश और भी बड़े सैन्य अभियान चला सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में नई सत्ता व्यवस्था बनने की प्रक्रिया में अमेरिका की भूमिका होनी चाहिए और खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में उन्होंने खारिज कर दिया।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरानी सेना और उससे जुड़े समूहों ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का दायरा फैलता जा रहा है और कई देश इस संघर्ष की चपेट में आ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह टकराव लंबे समय तक चल सकता है और वैश्विक राजनीति व अर्थव्यवस्था पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस युद्ध को लेकर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। हालांकि अमेरिका और इज़राइल के लगातार हमलों तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण हालात फिलहाल और ज्यादा गंभीर होते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संघर्ष अगर बढ़ता रहा तो यह पूरे मिडिल ईस्ट को बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
