
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे गंभीर सीमा विवाद में संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच “अस्थायी सीजफायर” यानी संघर्ष विराम होने का दावा किया है। ट्रंप ने इस बात का उल्लेख अपने सोशल-मीडिया प्लेटफॉर्म पर करते हुए कहा कि दोनों देश अस्थायी रूप से लड़ाई रोकने और शांति की ओर लौटने पर सहमत हुए हैं, और अमेरिका की मध्यस्थ भूमिका इस निर्णय में अहम रही है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए और जोर देकर कहा कि अमेरिका अब “वास्तव में संयुक्त राष्ट्र” की भूमिका निभा रहा है।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर संघर्ष पिछले महीनों से जारी है, जो दशकों पुराने विवादित सीमा दावों के कारण और मजबूत हुआ है। दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा रेखा को लेकर विवाद, खासकर प्रेअह विहियर मंदिर इलाके के आस-पास, पर लंबे समय से तनाव रहा है। इस विवाद ने दिसंबर 2025 में भीषण संघर्ष को जन्म दिया, जिसमें भारी गोलाबारी, हवाई हमले और तोपखाने का उपयोग हुआ। इस दौरान सैकड़ों सैनिक और नागरिक घायल हुए तथा हजारों लोगों को अपनी जान बचाने के लिए घरों से भागना पड़ा।
हाल ही में दोनों देशों ने 27 दिसंबर 2025 को एक नया सीजफायर समझौता किया है, जिसके तहत दोनों पक्षों ने ट्रूप मूवमेंट को रोकने, गोलीबारी बंद करने और नागरिकों के सुरक्षित घर वापसी का मार्ग खोलने पर सहमति दी है। यह समझौता पिछले हफ्तों में चले 20-दिन के संघर्ष को विराम देने का प्रयास है, जिसमें अब तक कम से कम 101 लोग मारे जा चुके हैं और लगभग आधा मिलियन से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
इस सीजफायर पर चीन ने भी अपनी संतुष्टि जताई है और दोनों देश प्रतिनिधियों के साथ युन्नान प्रांत में तीन-तरफा वार्ता की तैयारी कर रहा है। चीन ने वहाँ मानवीय सहायता भी प्रस्तावित की है ताकि युद्ध से प्रभावित लोगों को राहत मिल सके।
दूसरी तरफ, ट्रंप ने भी इस सीजफायर को वैश्विक शांति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया है और अमेरिका की भूमिका को बड़ाया है। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में अमेरिका ने कई संघर्ष-विकट क्षेत्रों में शांति की दिशा में मध्यस्थता की है और इसका गर्व महसूस करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह सीजफायर संघर्ष विराम समयबद्ध और अस्थायी हो सकता है, और यह पूरी तरह स्थायी शांति की गारंटी नहीं देता है क्योंकि सीमा विवाद अपने मूल में जटिल और पुराना है। ASEAN के अन्य देशों, चीन और अमेरिका की संयुक्त कूटनीतिक भूमिका अब इस संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
इन घटनाओं के बीच स्थानीय नागरिकों और विस्थापितों की स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है, और दोनों देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक और मानवतावादी स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। इस समय सभी की निगाहें आगामी कूटनीतिक वार्ताओं और सीजफायर के स्थायित्व पर टिकी हुई हैं, ताकि दक्षिण-पूर्व एशिया में शांति और स्थिरता लौट सके।



