
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में उस समय बड़ा हड़कंप मच गया जब पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष Farooq Abdullah पर जम्मू में जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान हुई, जहां अचानक एक व्यक्ति हथियार लेकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गया और गोली चला दी। हालांकि सुरक्षा कर्मियों की त्वरित कार्रवाई के कारण हमला नाकाम हो गया और फारूक अब्दुल्ला पूरी तरह सुरक्षित बच गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं।
घटना के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि यह उनकी किस्मत और ऊपरवाले की कृपा है कि वे इस हमले से बच गए। उन्होंने कहा, “भगवान ने मुझे बचा लिया, क्योंकि ऐसे मामलों में हमलावर के पास हमेशा बढ़त होती है।” उनके इस बयान ने घटना की गंभीरता को भी उजागर किया। उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ता है और ऐसे हमले लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हैं।
बताया जा रहा है कि हमलावर बेहद करीब तक पहुंच गया था और उसने पिस्तौल से गोली चलाई। उस समय फारूक अब्दुल्ला के साथ जम्मू-कश्मीर के डिप्टी मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी समेत कई नेता मौजूद थे। लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात क्लोज प्रोटेक्शन टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमलावर को काबू में कर लिया और बड़ी घटना होने से बचा लिया। पुलिस ने आरोपी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है।
इस हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। फारूक अब्दुल्ला जैसे वरिष्ठ नेता को Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है, ऐसे में हमलावर का इतने करीब तक पहुंच जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और फारूक अब्दुल्ला के बेटे Omar Abdullah ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक बड़ा सुरक्षा चूक का मामला है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए कि आखिर हथियार लेकर कोई व्यक्ति इतने करीब कैसे पहुंच गया।
राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। कई नेताओं ने फारूक अब्दुल्ला के सुरक्षित होने पर राहत जताई और सुरक्षा एजेंसियों से इस मामले की गहन जांच की मांग की है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब हमलावर के मकसद और उसके पीछे किसी साजिश की संभावना की भी जांच कर रही हैं।
कुल मिलाकर जम्मू में हुई यह घटना न केवल एक बड़े राजनीतिक नेता पर हमले की कोशिश थी, बल्कि इसने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति संभाल ली और एक संभावित बड़ी त्रासदी टल गई। आने वाले दिनों में जांच के बाद इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।



