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पटना में पूर्व आईपीएस अमिताभ दास गिरफ्तार: NEET छात्रा की मौत मामले में विवादित बयानों के बाद पुलिस हिरासत में, बड़ा दावा

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पटना, 13 फरवरी 2026: बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार शाम एक केन्द्रीय रूप से सुर्खियों में आया मामला और ताजा मोड़ सामने आया है, जब पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ कुमार दास को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब उन्होंने पटना में NEET छात्रा की मौत के मामले में कई विवादित और भड़काऊ बयान दिए थे, जिनके खिलाफ पुलिस ने शिकायत दर्ज कर चित्रगुप्त नगर थाना में मामला दर्ज किया था। अमिताभ दास के आवास पर पुलिस ने बड़ी छापेमारी भी की, जिसमें कई दस्तावेज़ और सामग्री ज़ब्त की गई हैं।

यह मामला उस NEET छात्रा की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जिसकी घटना जनवरी के शुरू में पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में हुई थी। शुरुआत में पुलिस ने इसे सम्भावित आत्महत्या बताया था, लेकिन बाद में फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य जानकारियों से “सेक्सुअल असॉल्ट” की आशंका भी प्रबल हुई है, तथा पिता और परिवार ने सीबीआई जांच की मांग की थी। इसी बीच राज्य सरकार ने भी मामले को CBI के सुपुर्द करने की सिफ़ारिश की थी।

पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने खुलेआम आरोप लगाए थे कि इस केस में विधानसभा नेता तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम भी शामिल हो सकता है और उनके DNA टेस्ट की आवश्यकता है, जिससे असल मामले की तह तक पहुँचा जा सके। इस आरोप ने राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों ही स्तरों पर गंभीर प्रतिक्रिया और विवाद को जन्म दिया। पुलिस ने उनके बयान को भ्रामक, उत्तेजक एवं जांच में प्रभाव डालने वाला बताया और इसके बाद ही उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई।

पुलिस ने अमिताभ दास को उनके घर पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित स्काइज अपार्टमेंट से हिरासत में लिया है। आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कई तथ्यहीन पोस्ट और बयान साझा किए थे, जिससे मामले का जांच पर गलत दबाव बन सकता है और कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी। छापेमारी में पुलिस टीम ने उनके घर से कई दस्तावेज़ एकत्रित किए हैं और वर्तमान में मामले की और गहनता से जांच की जा रही है।

गिरफ्तारी के समय अमिताभ दास ने मीडिया के सामने कई गंभीर दावे भी किए। उन्होंने कहा कि उन्हें निशांत कुमार को बचाने के लिए गिरफ्तार किया जा रहा है और उनके पास “सबूत” हैं, जिन्हें वे सीबीआई को सौंपने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी हत्या की कोशिश की गई और छापेमारी के दौरान कुछ सामान पुलिस ने ले लिया।

अमिताभ दास का करियर पहले भी विवादों से घिरा रहा है। वर्ष 2017 में उनके खिलाफ अनुशासनहीनता और पदाधिकारी मर्यादा का उल्लंघन जैसे आरोप आए और 2018 में उन्हें सेवाओं से जबरन रिटायर कर दिया गया था। इन घटनाओं का जिक्र आज के घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। छात्रा के परिजन, मानवाधिकार समूह और विरोधी दल इस मामले को न्याय का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य और केंद्र की एजेंसियाँ मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

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