
केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway) के साथ हाई-स्पीड रेल नेटवर्क (high-speed rail network) को जोड़ने की योजना पर जोर दिया है, जिससे प्रचारित विकास और कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। केंद्रीय बजट 2026-27 में रेल और सड़क दोनों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए विशेष घोषणाएँ की गई हैं, जिसमें नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है, जो गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े परियोजनाओं से जुड़े आर्थिक गलियारों को और आगे बढ़ाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे, जो लगभग 594 किमी लंबा सुपरफास्ट एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे है, मेरठ से प्रयागराज तक उत्तर प्रदेश के 12 जिलों — जैसे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज — को जोड़ता है, और यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तथा व्यापार-लॉजिस्टिक्स को गति देने के लिए एक नए आर्थिक गलियारे के रूप में उभर रहा है।
बजट में घोषित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क योजनाओं के तहत दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर सहित सात नए प्रोजेक्ट्स विकसित किए जाएंगे, जिनमें से कुछ रेल नेटवर्क संभावित रूप से गंगा एक्सप्रेसवे के विकास से आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और निवेश को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे पर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के जुड़ने से यात्रा समय में भारी कमी आएगी, व्यापार-पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा, और इन 12 जिलों में औद्योगिक, सेवा-आधारित और कृषि-संबंधी विकास गतिविधियाँ तेज़ होंगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल सकती है और इन क्षेत्रों में स्वरोज़गार तथा निवेश के अवसरों में वृद्धि संभव है।



