भारतीय क्रिकेट टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। रांची में खेले गए इस मैच में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 249 रन बनाए थे। इतने बड़े स्कोर के बावजूद भारतीय गेंदबाज लक्ष्य का बचाव नहीं कर सके और वेस्टइंडीज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस हार के बाद भारतीय टीम के प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं। मैच के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने गेंदबाजों का बचाव करते हुए माना कि टीम को बड़े स्कोर का बचाव करने का तरीका ढूंढना होगा।
वेस्टइंडीज की जीत के सबसे बड़े नायक शाई होप रहे, जिन्होंने केवल 45 गेंदों पर नाबाद 102 रन की तूफानी पारी खेली। उनके साथ शेरफेन रदरफोर्ड ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 37 गेंदों पर 84 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों के बीच चौथे विकेट के लिए 120 रन की अहम साझेदारी हुई, जिसने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। वेस्टइंडीज ने 18.3 ओवर में चार विकेट खोकर 250 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया। यह पुरुष टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे बड़े सफल रन चेज में से एक रहा।
भारतीय टीम की ओर से बल्लेबाजी में संजू सैमसन ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 82 रन की पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। इसके अलावा श्रेयस अय्यर ने 40 रन और तिलक वर्मा ने नाबाद 44 रन बनाकर स्कोर को 249 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। ईशान किशन ने भी 43 रन का योगदान दिया। भारतीय बल्लेबाजों ने तेजी से रन बनाए और ऐसा स्कोर खड़ा किया, जिसे बचाने के लिए गेंदबाजों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी। लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में खेलते हुए भारतीय टीम की रणनीति को चुनौती दी।
मैच के बाद गौतम गंभीर से पूछा गया कि क्या टीम प्रबंधन चाहता है कि पिच पर बल्ले और गेंद के बीच बेहतर मुकाबला देखने को मिले। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति हर कोई चाहता है। गंभीर ने बताया कि अगर मुकाबला केवल चौकों और छक्कों तक सीमित रहता है, तो क्रिकेट का संतुलन प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय गेंदबाज भी काफी मेहनत करके इस स्तर तक पहुंचे हैं और उनके करियर भी दांव पर हैं। इसलिए ऐसी पिचें होनी चाहिए, जहां बल्लेबाजों के साथ गेंदबाजों को भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिले।
गंभीर ने हालांकि हार का पूरा दोष पिच या ओस पर नहीं डाला। उन्होंने कहा कि सपाट पिच पर गेंदबाजी करना और ओस के बीच गेंद पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल होता है, लेकिन टीम को ऐसी परिस्थितियों में भी विपक्षी बल्लेबाजों को रोकने का रास्ता निकालना होगा। उनके मुताबिक, भारत जैसी विश्व चैंपियन टीम को लगातार सुधार करते रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वेस्टइंडीज जैसी आक्रामक टीम के खिलाफ 250 रन के लक्ष्य का बचाव करने के लिए गेंदबाजों को अलग-अलग रणनीतियों के साथ उतरना होगा।
भारतीय टीम के लिए मैच का एक अहम मोड़ शेरफेन रदरफोर्ड का कैच छूटना भी रहा। रदरफोर्ड जब 38 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तब मयंक यादव ने उनका कैच छोड़ दिया। इसके बाद रदरफोर्ड ने तेजी से रन बनाते हुए भारत की मुश्किलें बढ़ा दीं। हालांकि, गंभीर ने इस गलती के लिए किसी खिलाड़ी को जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में कैच छूटते हैं और कोई खिलाड़ी जानबूझकर ऐसा नहीं करता। इसलिए हार के लिए किसी एक घटना या खिलाड़ी को दोष देना उचित नहीं होगा।
गंभीर ने भारतीय गेंदबाजों के सामने मौजूद चुनौती का जिक्र करते हुए कहा कि टीम को यह समझना होगा कि शुरुआती विकेट मिलने के बाद भी मैच पर नियंत्रण कैसे बनाए रखा जाए। मुकाबले में वेस्टइंडीज ने शुरुआत में विकेट गंवाए थे, लेकिन इसके बावजूद उसके बल्लेबाजों ने दबाव में शानदार वापसी की। गंभीर के अनुसार, भारत को ऐसे हालात में अपनी लाइन और लेंथ में बदलाव करते रहना होगा, ताकि विपक्षी बल्लेबाज आसानी से रन न बना सकें। उन्होंने वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए कहा कि टीम ने जिस तरह लक्ष्य हासिल किया, उसका श्रेय उसे दिया जाना चाहिए।
इस हार के साथ पांच मैचों की टी20 सीरीज 1-1 से बराबर हो गई है। अब दोनों टीमों के बीच तीसरा मुकाबला रविवार को इंदौर में खेला जाना है। भारतीय टीम के लिए यह मैच वापसी का मौका होगा, जबकि वेस्टइंडीज जीत की लय बनाए रखने की कोशिश करेगी। टीम इंडिया को अगले मुकाबले में बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी और फील्डिंग में भी बेहतर प्रदर्शन करना होगा। रांची में मिली हार ने यह साफ कर दिया है कि टी20 क्रिकेट में बड़ा स्कोर बनाना ही काफी नहीं होता, बल्कि दबाव के क्षणों में सही रणनीति अपनाकर विपक्षी टीम को रोकना भी उतना ही जरूरी है।
