टीम इंडिया की लगातार शानदार जीत के पीछे सिर्फ खिलाड़ियों की मेहनत और हेड कोच गौतम गंभीर की रणनीति ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे काम करने वाली पूरी टीम का भी अहम योगदान है। न्यूजीलैंड दौरे के दौरान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ का एक वीडियो साझा किया है। इसमें गंभीर के साथ उन विशेषज्ञों की झलक दिखाई गई, जो खिलाड़ियों की फिटनेस, ट्रेनिंग, रिकवरी और रणनीति पर काम करते हैं। इस टीम में कुल 17 सदस्य शामिल हैं।
वीडियो 29 अक्टूबर को न्यूजीलैंड दौरे के चौथे टी20 इंटरनेशनल से पहले साझा किया गया। इसमें सपोर्ट स्टाफ के सदस्यों की यात्रा और उनके कामकाज की झलक देखने को मिली। आमतौर पर क्रिकेट प्रशंसकों की नजर मैदान पर खेल रहे 11 खिलाड़ियों पर रहती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम की तैयारी के लिए कई विशेषज्ञ लगातार काम करते हैं। इनका उद्देश्य खिलाड़ियों को मैच के लिए तैयार रखना और पूरे दौरे के दौरान उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद करना है।
भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक, गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल, स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले और फील्डिंग कोच सुभदीप घोष भी इस व्यवस्था का हिस्सा हैं। सभी की जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं। बल्लेबाजी कोच तकनीक और शॉट चयन पर काम करते हैं, जबकि गेंदबाजी कोच लाइन-लेंथ और रणनीति को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। फील्डिंग कोच खिलाड़ियों की कैचिंग, थ्रो और मैदान पर चुस्ती पर ध्यान देते हैं।
टीम की शारीरिक तैयारी की जिम्मेदारी स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रूक्स संभालते हैं। लगातार मैच खेलने और एक शहर से दूसरे शहर यात्रा करने के दौरान खिलाड़ियों की फिटनेस बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। ट्रेनिंग और रिकवरी की योजनाएं खिलाड़ियों की जरूरत के मुताबिक तैयार की जाती हैं, ताकि वे थकान और शारीरिक दबाव के बीच भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
मेडिकल टीम भी इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। टीम डॉक्टर डॉ. चार्ल्स मिंज के साथ हेड फिजियोथेरेपिस्ट कमलेश जैन और फिजियोथेरेपिस्ट योगेश परमार खिलाड़ियों की सेहत और चोट से जुड़ी जरूरतों पर काम करते हैं। वहीं, नंदन माजी और चेतन कुमार मसाजर के रूप में खिलाड़ियों को मांसपेशियों की थकान से उबरने और रिकवरी में मदद देते हैं। लंबे दौरे में इस तरह की सुविधाएं खिलाड़ियों की तैयारी और फिटनेस के लिहाज से महत्वपूर्ण होती हैं।
भारतीय टीम के ट्रेनिंग असिस्टेंट दयानंद गरानाई, उदेनाका नुवान और राघवेंद्र दुगी भी अभ्यास सत्रों में अहम भूमिका निभाते हैं। राघवेंद्र दुगी को क्रिकेट जगत में ‘रघु’ के नाम से जाना जाता है। वह थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट हैं और बल्लेबाजों को तेज गेंदों का अभ्यास कराते हैं, जिससे उन्हें मैच में तेज गेंदबाजों का सामना करने की तैयारी मिलती है। नेट्स में इस तरह का अभ्यास बल्लेबाजों की प्रतिक्रिया और तकनीक सुधारने में मदद करता है।
टीम के पीछे काम करने वाले अन्य सदस्यों में ऑपरेशन मैनेजर सुमीत एम., लॉजिस्टिक्स मैनेजर खाजा मुबास्सिरुद्दीन और परफॉर्मेंस एनालिस्ट हरि प्रसाद मोहन शामिल हैं। जहां ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कर्मचारी यात्रा, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं का तालमेल संभालते हैं, वहीं परफॉर्मेंस एनालिस्ट वीडियो फुटेज और आंकड़ों के जरिए खिलाड़ियों तथा विरोधी टीम के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हैं। इस जानकारी के आधार पर रणनीति तैयार करने में मदद मिलती है।
1983 में भारत ने कपिल देव की कप्तानी में वनडे विश्व कप जीता था। उस दौर की टीम के पास आज जैसी विशेषज्ञों से भरी सपोर्ट व्यवस्था नहीं थी। समय के साथ क्रिकेट में फिटनेस, मेडिकल सहायता, डेटा विश्लेषण और तकनीकी प्रशिक्षण की भूमिका बढ़ी है। अब खिलाड़ियों की तैयारी केवल नेट्स में अभ्यास तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसमें कई विभागों का समन्वय शामिल होता है।
भारत का मौजूदा न्यूजीलैंड दौरा तीनों प्रारूपों में कुल 12 मुकाबलों का है, जिसमें पांच टी20, पांच वनडे और दो टेस्ट मैच शामिल हैं। इतने लंबे कार्यक्रम में खिलाड़ियों की फिटनेस, कार्यभार और प्रदर्शन को संभालना चुनौतीपूर्ण होता है। सपोर्ट स्टाफ का यह वीडियो इसी व्यापक व्यवस्था की झलक दिखाता है। हालांकि, आधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञों की मौजूदगी जीत की गारंटी नहीं हैं, लेकिन खिलाड़ियों को बेहतर तैयारी का अवसर जरूर देती हैं।
