उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मीरपुर हिंदू गांव (लोनी) में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (waste management plant) के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद के बीच रविवार को भारी पुलिस-ग्रामीण संघर्ष हुआ, जिसमें 30 से अधिक ग्रामीणों सहित दो पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और पथराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, और इलाके में तनाव भरा माहौल देखने को मिला। इस संघर्ष ने स्थानीय प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था को संभालने की चुनौती खड़ी कर दी है।
विरोध की शुरुआत करीब डेढ़ महीना पहले ही उन ग्रामीणों द्वारा हुई थी, जिन्होंने निर्माणाधीन वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर लगातार चिंता जताई थी। उनका दावा था कि इस प्लांट के निर्माण से स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, और उन्होंने प्रशासन से इससे पहले समाधान निकालने का अनुरोध भी किया था।
रविवार को जब प्लांट का निर्माण कार्य शुरू हुआ, तो ग्रामीण पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन देने प्लांट साइट पर पहुंचे। ज्ञापन देने के बाद कुछ ग्रामीणों ने प्लांट के गेट पर लगे ताले तोड़ दिए और धरना-प्रदर्शन करने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही स्थिति तनावपूर्ण हुई, दोनों पक्षों के बीच पथराव शुरू हो गया। इसके बाद पुलिस ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिससे महिला समेत 30 से अधिक ग्रामीण घायल हुए और कई को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिस का दावा है कि ग्रामीणों ने पहले पुलिस पर पथराव किया, और इस कारण उन्हें हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। वहीं ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यवाही को अत्यधिक और अनुचित बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वे तो बस स्थानीय जमीन पर स्कूल या अस्पताल आदि सुविधाएं चाहते थे, न कि इस क्षेत्र को कूड़े के डंपिंग स्थल के रूप में बदलना। विरोधियों के अनुसार उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया ने स्थिति को गंभीर बना दिया।
घटना के बाद ग्रामीणों और पुलिस के बीच तनाव कायम है, और कुछ ग्रामीण अभी भी प्लांट के अंदर धरने पर बैठे हैं। स्थानीय किसान संगठनों से भी बातचीत जारी है और वे आगे की रणनीति तय करने की घोषणा कर चुके हैं। पुलिस ने इलाके में भारी बल तैनात कर दिया है ताकि कोई नई अप्रिय घटना न हो और स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि अब कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर है, लेकिन विरोध समाप्त नहीं हुआ है।
