डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की पैरोल मिल गई है। रोहतक की सुनारिया जेल में बंद राम रहीम मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को जेल से बाहर आया। यह 2020 के बाद उसकी 17वीं अस्थायी रिहाई है। पैरोल के दौरान उसके सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय जाने की जानकारी सामने आई है।
राम रहीम इस समय 2 साध्वियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। अगस्त 2017 में पंचकूला की विशेष CBI अदालत ने उसे दोनों मामलों में दोषी ठहराया था, जिसके बाद उसे सुनारिया जेल में रखा गया। इस मामले में सजा मिलने के बाद से उसे कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है।
इस बार मिली 21 दिन की पैरोल उसकी इस साल की तीसरी अस्थायी रिहाई है। इससे पहले जनवरी 2026 में उसे 40 दिन की पैरोल मिली थी और मई 2026 में उसे 30 दिन के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी गई थी। मई वाली पैरोल 24 जून को समाप्त हुई थी। अब अगस्त में एक बार फिर 21 दिन की रिहाई मिलने के बाद वह कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहेगा।
राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो मिलने का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। 2020 से अब तक उसकी अस्थायी रिहाई की संख्या 17 तक पहुंच गई है। अलग-अलग मौकों पर उसे 1 दिन से लेकर 50 दिन तक की पैरोल या फरलो मिल चुकी है। इस वजह से हर बार उसकी रिहाई राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनती रही है।
राम रहीम को बलात्कार के मामलों के अलावा पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामलों में भी दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने दोनों हत्या मामलों में उसे बरी कर दिया। बलात्कार के मामलों में मिली 20 साल की सजा के कारण वह अभी भी जेल में है।
पैरोल की अवधि में राम रहीम को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। उसकी पिछली रिहाइयों के दौरान भी उसके ठहरने की जगह और गतिविधियों को लेकर प्रशासन की ओर से शर्तें तय की जाती रही हैं। इस बार भी जेल से बाहर आने के बाद उसके सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय जाने की जानकारी सामने आई है।
राम रहीम की लगातार अस्थायी रिहाइयों को लेकर यह सवाल भी उठता रहा है कि गंभीर अपराध में सजा काट रहे किसी प्रभावशाली कैदी को बार-बार पैरोल दिए जाने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होनी चाहिए। दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से दी जाने वाली पैरोल और फरलो कानूनी प्रावधानों के तहत होती हैं। इसलिए मौजूदा मामले में भी उसकी रिहाई को संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
अब 21 दिन की इस पैरोल के दौरान राम रहीम की गतिविधियों पर नजर रहेगी। उसकी रिहाई के साथ एक बार फिर पैरोल व्यवस्था, कैदियों के अधिकार और गंभीर अपराधों में सजा काट रहे प्रभावशाली लोगों को मिलने वाली अस्थायी राहत को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
