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ग्वालियर में 1.30 करोड़ का खाद घोटाला उजागर, किसानों का हक बेचकर काली कमाई—तीन सहकारी समितियों पर FIR

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बड़ा खाद वितरण घोटाला सामने आया है, जिसने कृषि व्यवस्था और सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये के खाद गबन का खुलासा हुआ है, जहां किसानों के लिए आवंटित खाद को उन्हें देने के बजाय ब्लैक में अन्य लोगों को बेच दिया गया। इस घोटाले में तीन सहकारी समितियों की भूमिका सामने आई है, जिनके खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला कृषि शाख सहकारी समितियों के जरिए सामने आया, जहां सरकारी व्यवस्था के तहत किसानों को वितरित किए जाने वाले खाद को योजनाबद्ध तरीके से diverted कर दिया गया। आरोप है कि संबंधित समितियों के कर्मचारियों और संचालकों ने खाद को किसानों तक पहुंचाने के बजाय खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया और उससे मिली रकम सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय खुद हड़प ली।

इस घोटाले में जिन समितियों के नाम सामने आए हैं, उनमें बहु प्राथमिक कृषि शाख सहकारी संस्था पुट्टी-पिछोर, अजयगढ़-पिछोर और किटोरा-गिजौर्रा शामिल हैं। इन तीनों समितियों ने मिलकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया और करीब डेढ़ करोड़ रुपये की राशि का गबन किया। बताया जा रहा है कि खाद की आपूर्ति तो रिकॉर्ड में दिखाई गई, लेकिन वास्तविक रूप से किसानों को इसका लाभ नहीं मिला।

मामले का खुलासा होते ही प्रशासन और सहकारी विभाग में हड़कंप मच गया। जांच में सामने आया कि खाद वितरण के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर इसकी राशि सरकारी खाते में जमा नहीं कराई गई, जिससे संदेह और गहराया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित समितियों के संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

विभागीय स्तर पर अब गबन की गई राशि की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। वहीं, इस घटना ने किसानों के बीच भी नाराजगी पैदा कर दी है, क्योंकि उन्हें समय पर खाद नहीं मिलने से खेती पर सीधा असर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि सिस्टम में मौजूद खामियों को उजागर करता है। अगर समय रहते निगरानी और पारदर्शिता नहीं बढ़ाई गई, तो ऐसे घोटाले किसानों की स्थिति को और खराब कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, ग्वालियर का यह खाद घोटाला यह दिखाता है कि किस तरह भ्रष्टाचार के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ असली हकदारों तक नहीं पहुंच पाता। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों पर है कि वे इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करती हैं।

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