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महाकुंभ की वायरल ‘साध्वी’ हर्षा रिछारिया कर्ज की मार से आहत

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महाकुंभ 2025 (Prayagraj) में चर्चाओं का विषय बनीं हर्षा रिछारिया की कहानी इन दिनों फिर से सुर्खियों में है। वह शुरू में एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर और मॉडल थीं, जिनकी महाकुंभ के दौरान साध्वी के रूप में दिखाई गई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं और उन्हें “सबसे खूबसूरत साध्वी” के तौर पर पहचान मिली थी। इस वायरल पहचान के चलते उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ी और उन्हें आध्यात्मिक जीवन अपनाने के लिए भी खूब सराहा गया था, हालांकि उनके साध्वी होने को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए थे।

लेकिन अब हर्षा ने महाकुंभ और धर्म से जुड़े जीवन से दूरी बनाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है और बताया है कि पिछले लगभग ढाई साल से चुनौतियों का सामना करने के बाद वह फिर से ग्लैमर दुनिया में लौटेंगी। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि लगातार तिरस्कार, सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और चरित्र हनन ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है और वस्तुतः कर्ज (debt) की वजह से भी उन्हें यह फैसला लेना पड़ा है।

हर्षा रिछारिया ने एक भावुक वीडियो संदेश में कहा कि उनका सनातन धर्म से मोहभंग नहीं हुआ है, लेकिन धर्म के खुले प्रचार-प्रसार और साध्वी रूप में चलने की कठिनाइयों ने उन्हें गंभीर मानसिक दबाव में डाल दिया था। उन्होंने कहा कि कोरोना के बाद से उन्हें लगातार विरोध, आलोचना और सवालों का सामना करना पड़ा और यह सब उनके मनोबल को प्रभावित करता रहा।

उन्होंने यह भी कहा कि वह कभी “सीता” नहीं हैं कि हर बार “अग्निपरीक्षा” देती रहें, और इतने लंबे समय तक समाज और संत समुदाय की टिप्पणियों का सामना करना उनके लिए आसान नहीं रहा। इन सारी विपरीत परिस्थितियों और लगातार सामाजिक तथा मानसिक दबाव के चलते उन्होंने अपना निर्णय बदला है।

बताया जा रहा है कि हर्षा अब मौनी अमावस्या के बाद प्रयागराज माघ मेले में गंगा स्नान के साथ आध्यात्मिक अध्याय को विराम देंगी और ग्लैमर वर्ल्ड में वापसी करेंगी—जहाँ वह पहले मॉडलिंग, एंकरिंग और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएशन जैसे पेशे से जुड़ी थीं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ग्लैमर दुनिया में लौटना उनके लिए मानसिक शांति और आत्म-संतुलन पाने का रास्ता होगा, जिससे वह फिर से आर्थिक रूप से स्थिर रह सकेंगी।

उनकी यह वापसी कुछ लोगों के लिए आश्चर्यचकित करने वाली हो सकती है, लेकिन हर्षा के मुताबिक यह फैसला उन्होंने अपने आर्थिक दबाव (debt) और समाज की आलोचनाओं से निजात पाने के लिए मजबूरी में लिया है। उनका मानना है कि धर्म को अपनाने या प्रचार करने के अपने फैसले को स्वीकार न कर पाने वाले लोगों के बीच चलना अब उनके लिए सुखद नहीं रहा और इसलिए वे अपने मूल करियर की तरफ़ लौटेंगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी उजागर किया है कि जब कोई व्यक्ति धर्म या समाज की अपेक्षाओं से अलग हट कर कोई नया मार्ग अपनाता है, तो उसे न केवल सकारात्मक प्रतिक्रिया बल्कि व्यक्तिगत जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर भारी प्रभाव डालने वाली नकारात्मक टिप्पणियाँ भी सहना पड़ सकता है। हर्षा की कहानी न केवल सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले व्यक्ति की उस पहचान के पीछे की चुनौतियों को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि समाज के दबाव और आलोचना का असर व्यक्ति के जीवन निर्णयों पर कितना गहरा हो सकता है।

कुल मिलाकर, हर्षा रिछारिया की महाकुंभ यात्रा की शुरुआत एक आध्यात्मिक परिवर्तन की प्रेरणादायक कहानी के रूप में हुई, लेकिन समय के साथ यह कहानी तनाव, विरोध, और आर्थिक वास्तविकताओं के दौर से गुजरते हुए अब पुनः ग्लैमर की दुनिया में वापसी जैसा नया अध्याय लिखने को है, जिससे वह अपने जीवन और करियर में नया संतुलन बनाने की कोशिश करेंगी।

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