हरियाणा पुलिस ने आज एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो कथित तौर पर पाकिस्तान के लिए जासूसी (espionage) करने के आरोप में हैं। इन आरोपियों को अंबाला और कैथल जिलों से पुलिस ने हिरासत में लिया है और इनसे पूछताछ जारी है, जबकि देश की संवेदनशील सूचनाएँ पड़ोसी मुल्क तक पहुँचा देने के संदेह पर व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।
अंबाला के मामले में मिली जानकारी के अनुसार एक स्थानीय ठेकेदार (contractor), जिस पहचान सुनिल (Sunil alias Sunny) के नाम से हुई है, पर आरोप है कि वह भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) स्टेशन और आसपास के रक्षा क्षेत्र से जुड़े संवेदनशील विवरण पाकिस्तान की ओर भेज रहा था। पुलिस को विशेष खुफिया इनपुट के आधार पर यह जानकारी मिली कि आरोपी सैन्य प्रतिष्ठान से जानकारी साझा कर रहा है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन सहित अन्य डिजिटल सबूतों को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी सुनिल वर्षों से अंबाला क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित एयरफोर्स स्टेशन में ठेकेदार के तौर पर काम कर रहा था, जिससे उसे संवेदनशील स्थानों और गतिविधियों तक पहुँच संभव हो गई थी। पूछताछ के शुरुआती चरण में यह भी पता चला है कि आरोपी कुछ फोटो और दस्तावेज़ीय सामग्री फोन पर संग्रहीत कर रहा था, जिनसे संकेत मिलता है कि यह जानकारी पाकिस्तान स्थित संभावित हैंडलर्स को भेजी जा रही थी, हालांकि सबूतों की पुष्टि अभी जारी है।
वहीं, कैथल से गिरफ्तार दूसरे आरोपी पर भी गंभीर आरोप हैं कि उसने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को संवेदनशील डेटा साझा किया। पिछले साल इसी तरह के मामलों में पंजाब और हरियाणा पुलिस ने कई अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लिया था, जिनमें वीडियो साझा करना, सैन्य प्रतिष्ठानों की फोटो भेजना और सीक्रेट जानकारी तक पहुंच साझा करना शामिल था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह गिरफ्तारी उस व्यापक जांच का हिस्सा है जिसमें जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले के बाद से भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी को गंभीरता से लिया है। पिछले साल इसी जांच के दौरान कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, छात्रों और अन्य नागरिकों को भी पाकिस्तानी एजेंटों के साथ संदिग्ध संपर्क में पाया गया था, और उनके खिलाफ अधिकारिक रहस्य अधिनियम (Official Secrets Act) और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए।
हरियाणा पुलिस के सीआईए-II (Crime Investigation Agency) अधिकारियों ने बताया कि इन मामलों में अक्सर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है, जहाँ जासूसी के लिए संपर्क स्थापित किया जाता है और संवेदनशील जानकारियाँ साझा की जाती हैं। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ डीटेल्ड साइबर जांच भी जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जानकारी किस तक पहुंचाई गई और किस स्तर तक इसका दायरा है।
सरकार और पुलिस अधिकारियों ने इस कार्रवाई को देश की एकीकृत सूचना तंत्र की मजबूती और सामना करने की क्षमता का उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए कोई भी कसर नहीं छोड़ी जाएगी और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी, चाहे आरोपी कोई भी हो।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि भारत-पाक सीमा पार खुफिया गतिविधियाँ दोनों तरफ से जारी हैं, और भारत अपनी सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सक्रिय रूप से ऐसे नेटवर्क की पहचान और पतन करने के लिए प्रशिक्षित कर रहा है। ऐसे मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक तनाव और सुरक्षा चुनौतियाँ आम नागरिकों और डिजिटल नेटवर्कों के जरिए भी उभर सकती हैं, जिन्हें रोकने के लिए समय पर कार्रवाई आवश्यक है।
पुलिस ने इस मामलें में आगे की जांच विस्तृत रूप से जारी रखने का ऐलान किया है, साथ ही गिरफ्तार आरोपियों को अगले अदालत में पेश करने तथा पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में रखने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि अंतरराष्ट्रीय जासूसी और देश के खिलाफ खुफिया गतिविधियों को गंभीरता से लिया जा रहा है और ऐसे प्रयासों को नाकाम करने के लिए प्रत्येक सुरक्षा तंत्र को सक्रिय रखा जा रहा है।
