
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक नया और गंभीर पहलू सामने आया है, जहां विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल के लिए ईरान से ज्यादा बड़ा खतरा अब लेबनान में सक्रिय संगठन Hezbollah बनता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अस्थायी युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने साफ कर दिया है कि यह समझौता लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई पर लागू नहीं होता। इसी वजह से युद्धविराम के कुछ ही घंटों बाद लेबनान की राजधानी बेरूत और अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई और भारी तबाही देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र ने इन हमलों को “भयावह” बताते हुए नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिज़्बुल्लाह इजरायल के लिए इसलिए ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि यह संगठन सीधे उसकी उत्तरी सीमा यानी लेबनान से सटा हुआ है और उसके पास हजारों रॉकेट और मिसाइलें मौजूद हैं। इसके विपरीत ईरान भौगोलिक रूप से दूर है, जिससे सीधे हमले की संभावना कम होती है, लेकिन हिज़्बुल्लाह “फ्रंटलाइन खतरा” बनकर सामने आता है।
इतिहास पर नजर डालें तो हिज़्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष कोई नया नहीं है। दोनों के बीच दशकों से टकराव जारी है और 2026 में यह संघर्ष फिर से तेज हो गया, खासकर तब जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद हिज़्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
मौजूदा हालात में स्थिति और जटिल इसलिए हो गई है क्योंकि ईरान-यूएस युद्धविराम को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। जहां ईरान और कुछ अन्य देश मानते हैं कि इस युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, वहीं इजरायल ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रखा है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान में हमले नहीं रुके तो यह युद्धविराम पूरी तरह टूट सकता है और क्षेत्र एक बार फिर बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, हिज़्बुल्लाह की ताकत सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि उसकी क्षेत्रीय पकड़, स्थानीय समर्थन और ईरान से मिलने वाली मदद भी है। यही कारण है कि इजरायल के लिए यह संगठन “प्रत्यक्ष और लगातार खतरा” बना हुआ है, जो किसी भी समय बड़े संघर्ष में बदल सकता है।
कुल मिलाकर, भले ही ईरान के साथ अस्थायी शांति बनी हो, लेकिन हिज़्बुल्लाह के चलते मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह स्थिति वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकती है।



