हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज घाटी में एक बेहद दिल को छू लेने वाली और अनोखी शादी का नज़ारा देखा गया, जिसने बर्फ के बावजूद ठंड और कठिन रास्तों को भी मात दी। तीन से चार फीट तक जमी मोटी बर्फ और बंद सड़कों के बावजूद दूल्हा गितेश ठाकुर ने अपनी बारात के साथ पैदल ही करीब 7 किलोमीटर का दुर्गम सफर तय किया ताकि वह दुल्हन उषा ठाकुर को उनके गाँव तक ले जा सके और शादी की सारी रस्में निभा सके। यह कहानी सिर्फ़ मौसम की मार नहीं बल्कि प्रेम, हिम्मत और पारिवारिक एकता की मिसाल बन गई है।
घटना 23 जनवरी की है जब मंडी क्षेत्र में भारी बर्फबारी शुरू हो गई और क्षेत्र की मुख्य सड़कें पूरी तरह बंद हो गईं। अंधेरा भी छा गया था लेकिन गितेश ने शादी को टालने का निर्णय नहीं लिया। उन्होंने अपने परिवार और चुनिंदा कुछ बारातियों के साथ बर्फ से ढके पैदल रास्तों से भैचड़ी गांव तक का सफर तय किया, जहाँ बर्फ की सफेद चादर के बीच विवाह समारोह बड़े ही सादगीभरे और भावनात्मक माहौल में संपन्न हुआ।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस तरह की बर्फबारी इस क्षेत्र में सामान्य बात है, लेकिन बारात लेकर पैदल 7 किलोमीटर चलना और दुल्हन को ससुराल तक पैदल ही ले जाना बेहद दुर्लभ और साहसिक घटना है, जिसे देखने के लिए आसपास के लोग भी इकठ्ठा हुए। बर्फीले मौसम ने शादी को और यादगार बना दिया और सोशल मीडिया पर इनकी यह यात्रा और शादी का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है।
शादी के बाद अगले दिन सुबह लगभग सवा सात बजे, जब विदाई का समय आया तो दुल्हन उषा भी अपने ससुराल के लिए पैदल ही निकल पड़ीं। दूल्हा-दुल्हन तथा कुछ बारातीयों ने दो घंटे की कठिन चढ़ाई चढ़ी और करीब चार घंटे पैदल सफ़र करके सुबह लगभग 11 बजे बुनालीघार अपने घर वापस पहुँचे।
दूल्हे के पिता देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि भारी बर्फ और कठिन मौसम के कारण पालकी उठाना भी जोखिम भरा था, इसलिए उन्होंने पारंपरिक साधनों को त्यागकर अपने जोश और जज़्बे से यह अनोखी शादी सफल बनाई। इस सादगीपूर्ण, भावनात्मक और कठिनाईयों भरे मार्ग ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से आए दर्शकों का भी दिल जीत लिया है।
यह शादी न केवल मौसम की कठिनाइयों के बीच प्रेम की शक्ति की प्रतीक है बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही निश्चय और हिम्मत से मुश्किल हालातों में भी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पल को खास बनाया जा सकता है।
